भारत-चीन सीमा पर बदली रणनीति: गलवान के बाद LAC पर भारत की बढ़ती सैन्य सतर्कता और बुनियादी ढांचा
टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन की सीमा पर स्थिति में बड़े बदलाव आए हैं। पिछले छह वर्षों में भारत ने अपनी सीमा रणनीति को पूरी तरह से बदल दिया है। इसमें बुनियादी ढांचे का तेजी से निर्माण और सैन्य सतर्कता को बढ़ाना शामिल है, जिससे पूर्वी लद्दाख और पूरी एलएसी (LAC) पर भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
VIMARSHNAARAD TVगलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद से भारत और चीन के बीच सीमा पर स्थिति काफी बदल गई है। टीवी9 भारतवर्ष की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2026 के बीच का समय भारत के लिए अपनी सीमा सुरक्षा रणनीति को पुनर्गठित करने का रहा है। इस दौरान भारत ने न केवल अपनी सैन्य सतर्कता को बढ़ाया है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विशेष जोर दिया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वी लद्दाख में भारत ने अपनी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को मजबूत किया है। सड़कों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण से भारतीय सेना की पहुंच दुर्गम इलाकों तक आसान हो गई है। इससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में सैनिकों और हथियारों की तैनाती में तेजी आई है।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि गलवान के बाद भारत ने अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। अब भारत एलएसी पर अधिक सक्रिय और सतर्क है। निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और ड्रोन का उपयोग भी बढ़ाया गया है, जिससे सीमा पर होने वाली हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके।
इसके अलावा, भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में रसद आपूर्ति और संचार प्रणालियों को भी सुदृढ़ किया है। यह सुनिश्चित किया गया है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सेना को हर प्रकार की सहायता समय पर उपलब्ध हो।
चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच, भारत ने अपनी कूटनीतिक और सैन्य तैयारियों के बीच एक संतुलन बनाए रखा है। ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा के बाद भी, जमीनी स्तर पर भारत ने अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया है।
आने वाले समय में भी भारत अपनी सीमा सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की नीति पर कायम है। बुनियादी ढांचे का निर्माण कार्य अभी भी जारी है, ताकि भविष्य की किसी भी चुनौती का सामना पूरी मजबूती के साथ किया जा सके।
यह बदलाव न केवल भारत की रक्षा नीति को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। एलएसी पर भारत की बदली हुई रणनीति अब एक नई वास्तविकता बन चुकी है।