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भारत में अब बनेंगे बेल्जियम के रॉकेट, थेल्स और कल्याणी समूह के बीच हुआ बड़ा रक्षा समझौता

भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए थेल्स और कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स ने एक महत्वपूर्ण साझेदारी की है। इस समझौते के तहत भारत में 70-मिमी नॉन-गाइडेड और लेजर-गाइडेड रॉकेटों का विकास और निर्माण किया जाएगा। इस पहल से देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और पहला पूर्ण भारतीय रॉकेट 2027 की शुरुआत तक तैयार होने की उम्मीद है।

भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को एक नई दिशा देते हुए थेल्स और कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स ने एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत में उन्नत रॉकेट प्रणालियों का निर्माण करना है। यह कदम देश की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

इस साझेदारी के अंतर्गत 70-मिमी नॉन-गाइडेड और लेजर-गाइडेड रॉकेटों का विकास और उत्पादन किया जाएगा। ये रॉकेट अपनी सटीकता और मारक क्षमता के लिए जाने जाते हैं, जो भविष्य में भारतीय वायु सेना की एयर स्ट्राइक क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाएंगे।

समझौते के अनुसार, इन रॉकेटों का निर्माण पूरी तरह से भारत में किया जाएगा। यह तकनीक हस्तांतरण और स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल रक्षा उपकरणों की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि देश में तकनीकी कौशल का भी विकास होगा।

परियोजना की समयसीमा के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया है कि पहला पूर्ण रूप से भारतीय रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार हो जाएगा। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दोनों कंपनियां मिलकर काम करेंगी और अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करेंगी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समझौते भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे। स्वदेशी निर्माण से विदेशी निर्भरता कम होगी और भारतीय सेना को अत्याधुनिक हथियार आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।

यह पहल 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों का हिस्सा है। कल्याणी समूह और थेल्स का यह सहयोग भविष्य की रक्षा जरूरतों को पूरा करने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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