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भारत में बिजली संकट का खतरा, कोयले की कमी से जूझ रहे हैं कई पावर प्लांट

लगातार पड़ रही भीषण गर्मी के कारण भारत में बिजली की मांग ने नया रिकॉर्ड बनाया है। इस बढ़ती मांग के बीच देश के करीब एक-तिहाई कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में ईंधन का स्टॉक बेहद कम स्तर पर पहुंच गया है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बिजली उत्पादन को सुचारू रखने के लिए कोयले की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है।

भारत में बिजली संकट का खतरा, कोयले की कमी से जूझ रहे हैं कई पावर प्लांट
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: Unknown author Unknown author or not provided · Public domain · Wikimedia Commons

देश में भीषण गर्मी के चलते बिजली की खपत में भारी उछाल देखा जा रहा है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ गया है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लगभग एक-तिहाई कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार चिंताजनक रूप से कम हो गया है। यह स्थिति आने वाले दिनों में बिजली संकट की आहट दे रही है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पावर प्लांटों को लगातार काम करना पड़ रहा है। हालांकि, कोयले की आपूर्ति उस गति से नहीं हो पा रही है, जिससे संयंत्रों का स्टॉक सुरक्षित स्तर पर बना रहे। इस असंतुलन के कारण कई बिजली इकाइयों के सामने उत्पादन जारी रखने का संकट खड़ा हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोयले की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। गर्मी के मौसम में बिजली की मांग में हुई इस अप्रत्याशित वृद्धि ने ऊर्जा ग्रिड पर भारी बोझ डाल दिया है। कोयला आधारित संयंत्र देश की कुल बिजली आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालते हैं, इसलिए इनका सुचारू रूप से चलना अत्यंत आवश्यक है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कोयले की कमी केवल एक या दो संयंत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक समस्या बन चुकी है। देश के एक बड़े हिस्से में बिजली संयंत्रों के पास ईंधन का स्टॉक गंभीर रूप से निचले स्तर पर है। यह स्थिति ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।

सरकार और संबंधित एजेंसियां इस संकट को टालने के लिए कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयासों में जुटी हैं। बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच के इस अंतर को पाटना फिलहाल प्रशासन के लिए प्राथमिकता बना हुआ है। कोयले की ढुलाई और वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

आने वाले हफ्तों में मौसम का मिजाज बिजली की मांग को और बढ़ा सकता है। ऐसे में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों की कार्यक्षमता पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि ईंधन की कमी बनी रहती है, तो देश के विभिन्न हिस्सों में बिजली कटौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

अंततः, यह स्थिति देश की ऊर्जा नीति और बुनियादी ढांचे की मजबूती की परीक्षा ले रही है। बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना न केवल औद्योगिक विकास के लिए, बल्कि आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों के लिए भी अनिवार्य है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01नवभारत टाइम्समूल रिपोर्ट देखें ↗