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भारत में राजनीतिक दलों का जाल: सैकड़ों करोड़ का चंदा, लेकिन चुनावी मैदान से दूरी

बीबीसी की एक पड़ताल के अनुसार, भारत में 2,800 से अधिक पंजीकृत राजनीतिक दल हैं, जिनमें से केवल 73 को चुनाव आयोग से राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त है। कई ऐसी पार्टियां हैं जिन्हें भारी मात्रा में चंदा तो मिलता है, लेकिन वे बहुत कम चुनाव लड़ती हैं, जो चुनावी फंडिंग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

भारत की चुनावी राजनीति में एक दिलचस्प और चिंताजनक पहलू सामने आया है। बीबीसी की पड़ताल के मुताबिक, देश में राजनीतिक दलों की संख्या 2,800 के आंकड़े को पार कर गई है। हालांकि, इनमें से अधिकांश पार्टियां चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेती हैं।

आंकड़ों के अनुसार, भारत के चुनाव आयोग ने केवल 73 राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय पार्टी के रूप में मान्यता दी है। शेष पार्टियां पंजीकृत तो हैं, लेकिन वे मुख्यधारा की राजनीति में बहुत कम दिखाई देती हैं।

पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि इनमें से कई ऐसी पार्टियां हैं जिन्हें भारी मात्रा में चंदा प्राप्त होता है। करोड़ों रुपये का चंदा मिलने के बावजूद, इन दलों द्वारा चुनाव लड़ने की दर काफी कम है, जो राजनीतिक फंडिंग के नियमों और उनकी उपयोगिता पर सवाल उठाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक दलों का यह बढ़ता हुआ जाल चुनावी पारदर्शिता के लिए एक चुनौती बन सकता है। चंदे का उपयोग और पार्टियों की सक्रियता के बीच का यह अंतर जांच का विषय है।

चुनाव आयोग के पास इन दलों के पंजीकरण और उनके वित्तीय विवरणों का रिकॉर्ड होता है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसी पार्टियों का होना जो चुनाव नहीं लड़तीं, व्यवस्था की खामियों की ओर इशारा करता है।

यह स्थिति आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय है, क्योंकि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का स्रोत और उसका उपयोग अक्सर सार्वजनिक बहस का हिस्सा होता है।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह पड़ताल उन राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालती है जो कागजों पर तो मौजूद हैं, लेकिन चुनावी मैदान में उनकी उपस्थिति नगण्य है।

आने वाले समय में चुनावी सुधारों के तहत इन दलों की जवाबदेही तय करने की मांग और तेज हो सकती है, ताकि चुनावी चंदे का दुरुपयोग रोका जा सके।

स्रोत

मूल संदर्भ

01BBC News हिंदीमूल रिपोर्ट देखें ↗