भारत सरकार की 'ज़िला निर्यात केंद्र' पहल: हर जिले को वैश्विक व्यापार का केंद्र बनाने की तैयारी
भारत सरकार ने 'ज़िला निर्यात केंद्र' (DEH) पहल के माध्यम से देश के हर जिले को निर्यात का हब बनाने की रणनीति अपनाई है। यह योजना स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रही है। जनवरी 2026 तक 770 से अधिक जिले इस पहल से जुड़ चुके हैं, जो भारत के समावेशी निर्यात विकास के लक्ष्य को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

भारत सरकार ने देश के निर्यात क्षेत्र को अधिक समावेशी और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 'ज़िला निर्यात केंद्र' (DEH) पहल को एक प्रमुख फ्रेमवर्क के रूप में लागू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक जिले की अनूठी क्षमताओं और संसाधनों का उपयोग करके उन्हें निर्यात नियोजन के केंद्र में बदलना है। यह दृष्टिकोण 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) की अवधारणा पर आधारित है, जो स्थानीय स्तर पर उत्पादित वस्तुओं को वैश्विक बाजारों तक पहुँचाने में मदद करता है।
निर्यात भारत की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। वर्ष 2024-25 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 825.25 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा था, जिसके 2025-26 में बढ़कर 863.11 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। पहले निर्यात गतिविधियाँ केवल बड़े औद्योगिक समूहों तक सीमित थीं, लेकिन अब दूरदराज के जिलों के उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
यह पहल कोई अलग वित्तीय योजना नहीं है, बल्कि एक समन्वय ढांचा है जो केंद्र और राज्य की मौजूदा योजनाओं के संसाधनों का उपयोग करती है। वाणिज्य विभाग और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) इसके कार्यान्वयन की निगरानी करते हैं। राज्य और जिला स्तर पर गठित समितियां निर्यात अवसरों की पहचान करने और स्थानीय बाधाओं को दूर करने का कार्य करती हैं। मार्च 2026 तक 590 जिलों के लिए निर्यात कार्य योजनाएं तैयार की जा चुकी हैं।
डीईएच पहल के तहत उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डाक घर निर्यात केंद्रों के माध्यम से छोटे उद्यमियों को वैश्विक पहुंच प्रदान की जा रही है। इसके अलावा, एक्जिम बैंक जैसे संस्थानों के साथ मिलकर चयनित जिलों में निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।
सरकार ने 1 जून 2026 से इस पहल के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए एक परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाया है। पहले चरण में 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इसका लक्ष्य नए निर्यातकों का पंजीकरण बढ़ाना और जीआई-टैग वाले उत्पादों के माध्यम से निर्यात मूल्य में वृद्धि करना है।
यह पहल न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को व्यापार और निवेश का केंद्र बना रही है, बल्कि भारत के 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। केंद्र, राज्यों और जिलों के बीच बेहतर तालमेल से भारत का निर्यात आधारित विकास और अधिक सुदृढ़ होगा।
