मथुरा की छाता शुगर मिल खोलने की मांग को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन, 30 गांवों में हुई पंचायत
उत्तर प्रदेश के मथुरा में छाता शुगर मिल को दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। तड़के पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाए जाने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। इस कार्रवाई के विरोध में 30 गांवों के लोगों ने पंचायत बुलाई और मिल की ओर कूच करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मिल का संचालन शुरू नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
VIMARSHNAARAD TVमथुरा में छाता शुगर मिल को फिर से चालू कराने के लिए स्थानीय निवासियों का आंदोलन एक बार फिर उग्र हो गया है। संवाद न्यूज एजेंसी के अनुसार, मिल के पुनरुद्धार की मांग को लेकर लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान रविवार तड़के पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया। इस कार्रवाई ने ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का दिया है।
पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में आसपास के 30 गांवों के लोगों ने एकजुट होकर एक बड़ी पंचायत का आयोजन किया। पंचायत में ग्रामीणों ने पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। बैठक में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि प्रशासन की सख्ती उनके हौसलों को नहीं तोड़ सकती और वे अपनी मांग पर अडिग हैं।
पंचायत के दौरान ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि वे अब मिल की ओर कूच करेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छाता शुगर मिल का बंद होना क्षेत्र के किसानों और स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ी समस्या है। मिल के बंद होने से रोजगार और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है, जिसे देखते हुए इसे तत्काल प्रभाव से चालू करना आवश्यक है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक मिल का संचालन विधिवत शुरू नहीं हो जाता, तब तक उनका आंदोलन किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और मिल को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
फिलहाल, क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है और बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर लामबंद हो रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी अगली रणनीति के तहत मिल परिसर की ओर बढ़ने की तैयारी में हैं।
यह पूरा मामला स्थानीय स्तर पर एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है। किसान और ग्रामीण लंबे समय से मिल को लेकर आश्वासन मिलने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होने से परेशान हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बढ़ते दबाव के बीच क्या कदम उठाता है।