ताज़ा अपडेटमहोबा: टिकरिया गांव में जलभराव के कारण श्मशान घाट तक शव यात्रा ले जाने को मजबूर हुए ग्रामीण
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महोबा: टिकरिया गांव में जलभराव के कारण श्मशान घाट तक शव यात्रा ले जाने को मजबूर हुए ग्रामीण

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के पनवाड़ी विकासखंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। टिकरिया गांव में एक बुजुर्ग की मृत्यु के बाद परिजन और ग्रामीण जलमग्न रास्ते से होकर शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने को विवश दिखे। इस हृदयविदारक दृश्य ने स्थानीय बुनियादी ढांचे की बदहाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

महोबा जिले के टिकरिया गांव से एक विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जहां ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए शव को पानी से भरे रास्ते से ले जाना पड़ा। पनवाड़ी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले इस गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे लोग घुटनों तक भरे पानी के बीच से गुजरकर शव यात्रा निकाल रहे हैं।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, गांव के एक बुजुर्ग व्यक्ति का निधन हो गया था। परंपरा के अनुसार, जब परिजन और ग्रामीण उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए श्मशान घाट की ओर ले जा रहे थे, तो उन्हें रास्ते में भारी जलभराव का सामना करना पड़ा। श्मशान घाट तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह से जलमग्न था, जिससे शव यात्रा में शामिल लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

वीडियो में दिखाई दे रहा है कि ग्रामीण शव को कंधों पर उठाए हुए सावधानीपूर्वक पानी के बीच से आगे बढ़ रहे हैं। इस दौरान वहां मौजूद लोगों में काफी आक्रोश और दुख देखा गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लंबे समय से इस रास्ते की स्थिति खराब है, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

यह घटना क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को उजागर करती है। श्मशान घाट जैसे संवेदनशील स्थान तक जाने वाले मार्ग का जलमग्न होना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए ताकि भविष्य में किसी को भी ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोग अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे शर्मनाक स्थिति बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की है। फिलहाल, इस मामले पर स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ग्रामीणों की यह मजबूरी चर्चा का विषय बनी हुई है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबामूल रिपोर्ट देखें ↗