मुजफ्फरनगर में भाकियू की महापंचायत, गन्ने के दाम और 16 सूत्रीय मांगों को लेकर गरजे किसान
मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की एक बड़ी महापंचायत आयोजित की गई। इस दौरान किसानों ने गन्ने का उचित मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठाई। महापंचायत में बिजली, खाद की उपलब्धता, कृषि ऋण और आवारा पशुओं से होने वाले नुकसान जैसे 16 प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई और सरकार से समाधान की मांग की गई।
VIMARSHNAARAD TVमुजफ्फरनगर में किसानों का एक बड़ा जमावड़ा देखने को मिला, जहां भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने अपनी मांगों को लेकर एक महापंचायत का आयोजन किया। राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में बड़ी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे। इस दौरान किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के समक्ष अपनी आवाज उठाई।
महापंचायत का मुख्य केंद्र गन्ने का मूल्य रहा। किसानों ने मांग की कि गन्ने का उचित मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाए। इसके अलावा, बिजली की दरों और खाद की उपलब्धता को लेकर भी किसानों ने अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि कृषि लागत बढ़ने के कारण उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, महापंचायत में कुल 16 प्रमुख मांगें उठाई गईं। इनमें कृषि ऋण माफी, गलत तरीके से दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेना, और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शामिल हैं। किसानों ने आवारा पशुओं द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे नुकसान पर भी गहरा रोष व्यक्त किया और प्रशासन से इसके स्थायी समाधान की मांग की।
किसानों ने कहा कि वे अपनी मेहनत का उचित हक चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। महापंचायत में वक्ताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और किसानों के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाया।
स्थानीय प्रशासन ने महापंचायत के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के पहुंचने से शहर के कई इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। भाकियू के नेताओं ने कहा कि यह महापंचायत किसानों की एकता का प्रतीक है और वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
किसानों की इन समस्याओं का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधे तौर पर पड़ रहा है। महापंचायत में आए किसानों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी फसल का सही दाम नहीं मिलेगा, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह किसानों के हितों को प्राथमिकता दे।
यह महापंचायत इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में किसान अपनी मांगों को लेकर और अधिक सक्रिय हो सकते हैं। प्रशासन और सरकार के लिए अब इन मुद्दों का समाधान निकालना एक बड़ी चुनौती होगी। किसान नेताओं ने कहा कि वे आगे की रणनीति पर जल्द ही चर्चा करेंगे।