मुजफ्फरपुर: मुस्लिम महिलाएं बना रही हैं भगवान कृष्ण की बांसुरी, सरकारी योजना से मिला नया संबल
मुजफ्फरपुर के मुर्गियाचक गांव में मुस्लिम परिवारों की पीढ़ियां बांसुरी बनाने का पुश्तैनी काम कर रही हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर इस कारोबार में काफी तेजी देखी जा रही है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिली 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता से गांव की महिलाओं ने कच्चा माल खरीदकर अपने इस पारंपरिक व्यवसाय को नई मजबूती दी है, जिससे उनकी बांसुरियां अब दूर-दराज के बाजारों तक पहुंच रही हैं।
VIMARSHNAARAD TVबिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मुर्गियाचक गांव में एक अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है। यहां करीब 80 मुस्लिम परिवार पीढ़ियों से बांसुरी बनाने का काम कर रहे हैं। जन्माष्टमी का त्योहार नजदीक आते ही इन कारीगरों के काम में काफी तेजी आ गई है। इस बार, सरकारी सहायता ने उनके इस पुश्तैनी कारोबार में नई जान फूंक दी है।
गांव की महिलाओं ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का लाभ उठाते हुए 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त की है। इस राशि का उपयोग उन्होंने बांसुरी बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल खरीदने में किया है। सरकारी मदद मिलने से न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ी है, बल्कि उन्हें अपने पारंपरिक हुनर को बड़े स्तर पर ले जाने का आत्मविश्वास भी मिला है।
कारीगरों का कहना है कि यह काम उनके परिवारों की पहचान का हिस्सा है। पहले पूंजी की कमी के कारण वे सीमित मात्रा में ही उत्पादन कर पाते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और सरकारी सहयोग से तैयार की गई बांसुरियां अब मुजफ्फरपुर के बाहर कई अन्य जिलों के बाजारों में भी पहुंच रही हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर बांसुरी की मांग में भारी उछाल आया है। कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं ताकि बाजार की मांग को पूरा किया जा सके। यह पहल न केवल स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दे रही है, बल्कि सामाजिक सद्भाव और पारंपरिक कला के संरक्षण का भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रही है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह का सहयोग मिलता रहा, तो यह छोटा सा गांव बांसुरी निर्माण का एक बड़ा केंद्र बन सकता है। महिलाओं द्वारा निभाई जा रही यह भूमिका न केवल उनके आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त कर रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक प्रेरणा बनी है।