मुरादाबाद में केंद्रीय योजनाओं का बुरा हाल, बजट के अभाव में कागजों तक सीमित विकास
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में केंद्र सरकार की आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण योजनाएं केवल कागजों पर ही चल रही हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इन योजनाओं के लिए आवश्यक बजट और स्पष्ट लक्ष्यों का अभाव है, जिसके कारण ये धरातल पर दम तोड़ रही हैं। स्थानीय प्रशासन को अब दिल्ली से विशेष सहयोग की उम्मीद है ताकि इन विकास कार्यों को गति मिल सके।
VIMARSHNAARAD TVमुरादाबाद जिले में विकास की गति को तेज करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की गई थीं। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि इन योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में आधा दर्जन से अधिक केंद्रीय योजनाएं केवल फाइलों में ही सिमट कर रह गई हैं।
इन योजनाओं के ठप होने का मुख्य कारण बजट की कमी बताया जा रहा है। बिना पर्याप्त धन के, किसी भी विकास कार्य को आगे बढ़ाना संभव नहीं है। इसके अलावा, इन योजनाओं के लिए कोई ठोस लक्ष्य निर्धारित न होने से भी काम में बाधा आ रही है।
स्थानीय स्तर पर इन योजनाओं को लेकर काफी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट के अभाव में ये योजनाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। प्रशासन के पास इन कार्यों को शुरू करने के लिए फिलहाल कोई वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
अधिकारियों का मानना है कि यदि दिल्ली से इन योजनाओं के लिए बजट जारी किया जाए, तो विकास की तस्वीर बदल सकती है। केंद्र सरकार की दरियादिली ही इन अटके हुए कार्यों को फिर से शुरू करने का एकमात्र रास्ता है।
इन योजनाओं का उद्देश्य जिले के बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण में सुधार करना था। लेकिन बजट की कमी के कारण ये उद्देश्य अधूरे ही नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोग भी इन योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर चिंतित हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, समय-समय पर इन योजनाओं की समीक्षा की जाती है, लेकिन बजट की कमी के कारण कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पा रहे हैं। यह स्थिति विकास कार्यों की धीमी गति के लिए जिम्मेदार है।
आने वाले समय में यदि केंद्र सरकार द्वारा बजट आवंटित किया जाता है, तो इन योजनाओं को फिर से पटरी पर लाया जा सकता है। फिलहाल, मुरादाबाद में विकास की राह बजट की प्रतीक्षा में रुकी हुई है।