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मेरठ: यातना मामले में दिग्विजय भाटी का समझौता, आईपीएस अविनाश पांडेय पर कार्रवाई न करने की मांग

मेरठ में डॉक्टर दिग्विजय भाटी और उनके साथी मोहित जाटव ने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। अब डॉक्टर भाटी ने डीआईजी सहारनपुर को शपथ पत्र देकर मामले में समझौता कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अब तत्कालीन एसएसपी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते हैं।

मेरठ में चर्चा का विषय बने यातना मामले में एक नया मोड़ आया है। डॉक्टर दिग्विजय भाटी और उनके सहयोगी मोहित जाटव ने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और तत्कालीन सिविल लाइन इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ पर गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों में प्रताड़ना और दुर्व्यवहार की बातें शामिल थीं, जिसने स्थानीय स्तर पर काफी हलचल पैदा कर दी थी।

अब इस मामले में डॉक्टर दिग्विजय भाटी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए समझौता कर लिया है। उन्होंने सहारनपुर के डीआईजी को एक औपचारिक शपथ पत्र सौंपा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं।

शपथ पत्र में डॉक्टर भाटी ने साफ तौर पर उल्लेख किया है कि वे तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने मामले को सुलझाने की इच्छा व्यक्त की है, जिससे कानूनी प्रक्रिया में बदलाव की संभावना बन गई है।

यह मामला काफी समय से सुर्खियों में था और पुलिस विभाग के भीतर भी इसकी चर्चा थी। डॉक्टर भाटी और मोहित जाटव द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की मांग की जा रही थी। हालांकि, अब समझौते के बाद स्थिति पूरी तरह से बदल गई है।

अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर भाटी ने अपनी मर्जी से यह फैसला लिया है। उन्होंने डीआईजी को दिए गए शपथ पत्र में कहा है कि वे अब कोई शिकायत नहीं रखना चाहते। इस कदम से मामले में चल रही कानूनी खींचतान के समाप्त होने के संकेत मिल रहे हैं।

अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस समझौते के बाद पुलिस विभाग की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी जाएगी। हालांकि, शिकायतकर्ता द्वारा कार्रवाई न करने की मांग के बाद मामले की गंभीरता में कमी आना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोग और संबंधित पक्ष अब इस पूरे प्रकरण के अंतिम निपटारे का इंतजार कर रहे हैं। डॉक्टर भाटी का यह निर्णय मामले को शांत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, मेरठमूल रिपोर्ट देखें ↗