यमुना किनारे वन विभाग को मिले चित्रा इंडिका कछुए के 1500 अंडे, सर्वे में 20 प्रजनन स्थल चिह्नित
आगरा में यमुना नदी के तट पर वन विभाग के सर्वेक्षण के दौरान दुर्लभ चित्रा इंडिका प्रजाति के कछुओं के 1500 अंडे मिले हैं। विभाग ने इस क्षेत्र में 20 प्रजनन स्थलों की पहचान की है। यह प्रजाति संकटग्रस्त श्रेणी में आती है और इनके संरक्षण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
VIMARSHNAARAD TVआगरा में यमुना नदी के किनारे वन विभाग की टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण के दौरान, विभाग को दुर्लभ चित्रा इंडिका प्रजाति के कछुओं के लगभग 1500 अंडे मिले हैं। ये अंडे नदी के किनारे रेत में दबे हुए पाए गए। वन विभाग की टीम ने इस पूरे इलाके में कुल 20 ऐसे प्रजनन स्थलों को चिह्नित किया है, जहाँ ये कछुए अंडे देते हैं।
चित्रा इंडिका प्रजाति के कछुए अपने विशाल आकार के लिए जाने जाते हैं। ये कछुए छह फीट तक लंबे हो सकते हैं और इनका वजन तीन क्विंटल तक पहुंच सकता है। अपनी विशिष्ट शारीरिक बनावट और दुर्लभता के कारण, ये जीव पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वर्तमान में यह प्रजाति संकटग्रस्त जीवों की श्रेणी में शामिल है, जिसके कारण इनके संरक्षण को लेकर वन विभाग काफी सतर्क है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यमुना का किनारा इन कछुओं के प्रजनन के लिए एक अनुकूल स्थान साबित हो रहा है। रेत में दबे हुए अंडों की इतनी बड़ी संख्या मिलना इस बात का संकेत है कि यह क्षेत्र इन जीवों के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल है। विभाग अब इन प्रजनन स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी रखने की योजना बना रहा है।
इस खोज के बाद से स्थानीय वन विभाग की टीम ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कछुओं की आबादी को बचाने के लिए उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना अनिवार्य है। चित्रा इंडिका कछुओं की सुरक्षा के लिए विभाग द्वारा भविष्य में और भी कड़े कदम उठाए जाने की संभावना है ताकि इस दुर्लभ प्रजाति को विलुप्त होने से बचाया जा सके।