यादगीर में आरएसएस मार्च में शामिल होने पर दो सरकारी शिक्षकों को नौ महीने बाद किया गया निलंबित
कर्नाटक के यादगीर जिले में दो सरकारी स्कूल शिक्षकों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक मार्च में भाग लेने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई घटना के नौ महीने बाद की गई है। अधिकारियों ने बताया कि शिक्षकों पर सरकारी नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। इस मामले ने राज्य में राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है, जहां विपक्षी और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस देखी जा रही है।
VIMARSHNAARAD TVकर्नाटक के यादगीर जिले में शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए दो सरकारी शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। इन शिक्षकों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा आयोजित एक रूट मार्च में हिस्सा लेने का आरोप है। यह कार्रवाई घटना के करीब नौ महीने बाद की गई है, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा हो रही है।
न्यूज18 कन्नड़ और द फेडरल की रिपोर्ट के अनुसार, इन शिक्षकों ने अपनी ड्यूटी के दौरान या उसके बाद आरएसएस के कार्यक्रम में भागीदारी की थी। सरकारी सेवा नियमों के तहत, सरकारी कर्मचारियों को राजनीतिक या वैचारिक संगठनों के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल होने से प्रतिबंधित किया गया है। इसी नियम के उल्लंघन को आधार बनाकर यह निलंबन आदेश जारी किया गया है।
घटना के इतने लंबे समय बाद हुई इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने और तथ्यों की पुष्टि होने के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान शिक्षकों को विभागीय नियमों के अनुसार प्रक्रिया का पालन करना होगा।
इस मामले ने राज्य की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे का नाम भी इस घटनाक्रम से जोड़ा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने पहले भी सरकारी कर्मचारियों के आचरण को लेकर सख्त रुख अपनाया था। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
विपक्ष ने इस कार्रवाई को बदले की भावना से प्रेरित बताया है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि यह केवल सरकारी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने अपनी आधिकारिक स्थिति का उपयोग करते हुए एक विशिष्ट विचारधारा के कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों से अपेक्षा की जाती है कि वे तटस्थ रहें और किसी भी राजनीतिक या अर्ध-राजनीतिक संगठन के कार्यक्रमों से दूर रहें। इस निलंबन के माध्यम से विभाग अन्य कर्मचारियों को भी यह संदेश देना चाहता है कि नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फिलहाल, निलंबित शिक्षकों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में इस मामले में और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है, क्योंकि विभागीय जांच अभी भी जारी रह सकती है। यह घटना सरकारी कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।