युवाओं में तेजी से बढ़ रहे दिल के दौरे के मामले, विशेषज्ञ मान रहे हैं जीवनशैली को जिम्मेदार
आगरा के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र के लोगों में हृदय रोगों का खतरा चिंताजनक रूप से बढ़ा है। एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी कराने वाले मरीजों में 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं की हिस्सेदारी 21 फीसदी तक पहुंच गई है। तनाव, शारीरिक फिटनेस की कमी, असंतुलित खान-पान और मोटापा इस गंभीर स्थिति के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं, जिसके चलते युवाओं में असमय मृत्यु के मामले भी सामने आ रहे हैं।
VIMARSHNAARAD TVहाल के दिनों में युवाओं के बीच हृदय संबंधी बीमारियों के मामलों में हुई वृद्धि ने चिकित्सा जगत को सतर्क कर दिया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, दिल की धड़कन में असामान्य बदलाव को नजरअंदाज करना घातक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब हृदय रोग केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि युवा पीढ़ी भी इसकी चपेट में तेजी से आ रही है।
आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति काफी गंभीर नजर आती है। एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाओं से गुजरने वाले मरीजों में 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं की संख्या 21 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि कम उम्र में ही हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक, इस समस्या के पीछे आधुनिक जीवनशैली का बड़ा हाथ है। अत्यधिक मानसिक तनाव, शारीरिक गतिविधियों का अभाव और खराब फिटनेस स्तर हृदय स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहे हैं। लोग अपनी व्यस्त दिनचर्या में व्यायाम के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं, जो हृदय की मांसपेशियों को कमजोर बना रहा है।
खान-पान की गलत आदतें भी इस बीमारी को बढ़ावा देने में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। जंक फूड और असंतुलित आहार के सेवन से मोटापा बढ़ रहा है, जो सीधे तौर पर हृदय रोगों के जोखिम को आमंत्रित करता है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल और अन्य तत्वों का असंतुलन युवाओं को कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रहा है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि दिल की धड़कन में कोई भी असामान्य बदलाव महसूस हो, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए। समय रहते जांच और जीवनशैली में बदलाव करके इन खतरों को कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतने से युवाओं में असमय मृत्यु के मामले भी बढ़ रहे हैं, जो एक चिंता का विषय है।
इस स्थिति से निपटने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और तनाव प्रबंधन को प्राथमिकता देना आवश्यक है। डॉक्टरों का सुझाव है कि संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है। युवाओं को अपनी सेहत के प्रति अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है ताकि वे इस गंभीर संकट से बच सकें।