यूपीएसएलडीसी में संविदाकर्मियों की छंटनी का प्रस्ताव मंजूर, ऊर्जा संगठनों ने जताया कड़ा विरोध
उत्तर प्रदेश स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (यूपीएसएलडीसी) में कार्यरत 25 प्रतिशत संविदाकर्मियों की छंटनी करने के प्रस्ताव को उच्च स्तर से मंजूरी मिल गई है। इस निर्णय के सामने आते ही राज्य के विभिन्न ऊर्जा संगठनों ने विरोध जताना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों की आजीविका पर मंडरा रहे इस संकट को लेकर संबंधित विभागों में हलचल तेज हो गई है।
VIMARSHNAARAD TVअमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (यूपीएसएलडीसी) में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। विभाग में कार्यरत कुल संविदाकर्मियों में से 25 प्रतिशत की छंटनी किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिसे अब उच्च स्तर से आधिकारिक मंजूरी प्राप्त हो गई है।
इस फैसले के लागू होने की संभावनाओं के बीच राज्य के ऊर्जा संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। संगठनों का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है और इससे बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो सकते हैं। विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से वे इस निर्णय को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
यूपीएसएलडीसी में काम करने वाले इन संविदाकर्मियों की छंटनी का प्रस्ताव काफी समय से चर्चा में था। अब जब इसे मंजूरी मिल गई है, तो कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना देखी जा रही है। ऊर्जा संगठनों के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रस्ताव को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, इस छंटनी के पीछे प्रशासनिक और वित्तीय कारणों का हवाला दिया जा रहा है। हालांकि, कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि इन कर्मियों की सेवाएं विभाग के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। बिना किसी ठोस विकल्प के छंटनी करना अनुचित है।
फिलहाल, इस मामले पर विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन संगठनों के विरोध के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
यह मामला उत्तर प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा विवाद बन गया है। संविदाकर्मियों की भविष्य की सुरक्षा को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। ऊर्जा संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने साथियों के साथ खड़े हैं और इस छंटनी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
प्रशासनिक स्तर पर इस प्रस्ताव के क्रियान्वयन को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट दिखाई दे रहे हैं और विरोध का सिलसिला जारी है।