यूपी: 'आपदाओं की तरह घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा देने की नीति बनाए सरकार', हाईकोर्ट के निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि सरकार को प्राकृतिक आपदाओं के अलावा अन्य आकस्मिक घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक स्पष्ट नीति तैयार करनी चाहिए। यह निर्देश राज्य में विभिन्न प्रकार की दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से दिया गया है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश में अब प्राकृतिक आपदाओं के अलावा अन्य आकस्मिक घटनाओं के पीड़ितों को भी मुआवजा मिल सकेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को इस संबंध में एक व्यापक नीति बनाने का निर्देश दिया है। अदालत का मानना है कि ऐसी घटनाओं के पीड़ितों को राहत देना सरकार की जिम्मेदारी है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में केवल प्राकृतिक आपदाओं के लिए ही मुआवजा प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन अन्य प्रकार की दुर्घटनाओं में पीड़ितों को अक्सर आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती। अदालत ने सरकार से कहा है कि वह एक ऐसी व्यवस्था विकसित करे जिससे पीड़ितों को समय पर मदद मिल सके।
यह निर्देश राज्य में होने वाली विभिन्न प्रकार की अनपेक्षित घटनाओं को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। अक्सर देखा जाता है कि सड़क दुर्घटनाओं, आग लगने या अन्य मानवीय भूलों के कारण होने वाली घटनाओं में पीड़ित परिवार बेसहारा हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में सरकार की ओर से कोई ठोस नीति न होने के कारण उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस नीति को तैयार करते समय पीड़ितों की आर्थिक स्थिति और घटना की गंभीरता को ध्यान में रखे। यह नीति पारदर्शी होनी चाहिए ताकि जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके। सरकार को इस कार्य के लिए एक निश्चित समय सीमा के भीतर कदम उठाने होंगे।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह आदेश राज्य में सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने वाला है। यदि सरकार इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करती है, तो यह उन हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत होगी जो किसी न किसी दुर्घटना का शिकार होकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि मुआवजे की राशि और पात्रता के मानदंड स्पष्ट होने चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद से बचा जा सके। सरकार को अब इस दिशा में कार्य योजना तैयार करनी होगी और उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
यह निर्णय राज्य प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती और अवसर दोनों है। प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि नीति का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर हो और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद अब राज्य सरकार की ओर से अगली कार्रवाई का इंतजार है।