ताज़ा अपडेटयूपी: एसआईआर व्यवस्था पर सवाल उठाने को लेकर ओपी राजभर ने सपा और कांग्रेस पर साधा निशाना
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यूपी: एसआईआर व्यवस्था पर सवाल उठाने को लेकर ओपी राजभर ने सपा और कांग्रेस पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश के मंत्री ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि इसी एसआईआर प्रणाली के तहत उनके 43 सांसद लोकसभा चुनाव में विजयी हुए थे।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एसआईआर (SIR) प्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। राज्य के मंत्री ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया है। राजभर ने विपक्षी दलों की ओर से इस व्यवस्था पर उठाए गए सवालों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने तर्क दिया कि इसी चुनावी ढांचे के भीतर विपक्षी गठबंधन को सफलता मिली थी।

राजभर ने अपने बयान में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के 37 उम्मीदवार जीते थे। इसके अलावा, कांग्रेस पार्टी के भी छह सांसद इसी व्यवस्था के माध्यम से निर्वाचित होकर संसद पहुंचे थे।

मंत्री ने सवाल किया कि यदि यह प्रणाली दोषपूर्ण थी, तो फिर विपक्षी दलों ने इसके तहत मिली जीत को स्वीकार क्यों किया। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। राजभर के अनुसार, जब परिणाम उनके पक्ष में होते हैं तो वे चुप रहते हैं, लेकिन अन्य समय में वे व्यवस्था पर ही सवाल खड़े करने लगते हैं।

अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, राजभर का यह बयान राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का बदलाव या सवाल उठाने से पहले विपक्ष को अपनी पिछली जीतों का विश्लेषण करना चाहिए।

यह विवाद तब सामने आया जब विपक्षी दलों ने एसआईआर प्रणाली की निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त किया था। राजभर ने इसे पूरी तरह से निराधार बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सभी को समान अवसर मिलते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जनता ने जनादेश दिया है और उसे स्वीकार करना ही लोकतंत्र की असली खूबसूरती है। राजभर ने विपक्ष को सलाह दी कि वे नकारात्मक राजनीति छोड़कर विकास के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें।

अंत में, राजभर ने दोहराया कि उत्तर प्रदेश में चुनावी परिणाम इसी प्रणाली की पारदर्शिता को दर्शाते हैं। उन्होंने विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे अपनी हार-जीत के लिए संवैधानिक व्यवस्थाओं को निशाना बनाना बंद करें।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊमूल रिपोर्ट देखें ↗