यूपी के एडेड माध्यमिक विद्यालयों में खत्म होगा प्राधिकारी नियंत्रक का दौर, शासन ने मांगा स्पष्टीकरण
उत्तर प्रदेश सरकार ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रबंध समितियों के चुनाव में देरी कर प्राधिकारी नियंत्रक बने रहने की प्रथा पर सख्ती दिखाई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, शासन ने इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया है। यह निर्णय विद्यालयों के संचालन में पारदर्शिता लाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने के उद्देश्य से लिया गया है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में लंबे समय से चली आ रही प्राधिकारी नियंत्रक की व्यवस्था अब बदलने वाली है। शासन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रबंध समिति के चुनाव को जानबूझकर लटकाकर पद पर बने रहने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है।
अक्सर देखा गया है कि एडेड विद्यालयों में प्रबंध समिति के चुनाव समय पर नहीं कराए जाते, जिससे प्राधिकारी नियंत्रक का नियंत्रण बना रहता है। शासन का मानना है कि यह व्यवस्था विद्यालयों के सुचारू संचालन और जवाबदेही के लिए उचित नहीं है।
शासन द्वारा जारी निर्देशों के तहत अब यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रबंध समितियों का गठन लोकतांत्रिक तरीके से और समय पर हो। इस कदम से विद्यालयों के प्रबंधन में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
अमर उजाला ब्यूरो के अनुसार, लखनऊ में इस मुद्दे पर शासन ने गंभीरता दिखाई है। अधिकारियों को यह स्पष्ट करने के लिए कहा गया है कि किन कारणों से चुनाव प्रक्रिया में देरी हो रही है और अब तक चुनाव क्यों नहीं कराए गए हैं।
यह निर्णय उन विद्यालयों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जहां लंबे समय से चुनाव नहीं हुए हैं। शासन की इस सख्ती से उन लोगों में हड़कंप मच गया है जो चुनाव टालकर अपनी सत्ता बनाए रखना चाहते थे।
शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि यह कदम एडेड माध्यमिक विद्यालयों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे विद्यालयों में व्याप्त मनमानी पर भी अंकुश लगेगा।
आने वाले दिनों में शासन की ओर से इस संबंध में और भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। फिलहाल, संबंधित अधिकारियों को शासन के सवालों का जवाब देना होगा, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।