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यूपी के प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी, बदले नियमों से मिलेगी राहत

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस परीक्षा के लिए कटऑफ अंकों में कमी की गई है और इसमें माइनस मार्किंग का प्रावधान भी नहीं रखा गया है। इन बदलावों का उद्देश्य शिक्षकों के लिए परीक्षा प्रक्रिया को सरल बनाना है।

यूपी के प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी, बदले नियमों से मिलेगी राहत
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: Vice President's Secretariat · GODL-India · Wikimedia Commons

उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विशेष टीईटी परीक्षा के लिए कटऑफ अंकों को घटा दिया गया है। इसके अलावा, परीक्षा में माइनस मार्किंग की व्यवस्था को पूरी तरह से हटा दिया गया है। इन बदलावों से शिक्षकों के लिए परीक्षा उत्तीर्ण करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगा।

शासन का मानना है कि इन नए नियमों से शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और वे बेहतर तरीके से परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। यह विशेष परीक्षा उन शिक्षकों के लिए एक अवसर के रूप में देखी जा रही है जो अब तक पात्रता परीक्षा के मानकों को पूरा नहीं कर पाए थे।

परीक्षा के आयोजन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे। शिक्षकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें। इस पहल से राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की योग्यता और पात्रता संबंधी समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय शिक्षकों की मांग और उनकी कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। परीक्षा का स्वरूप सरल रखा गया है ताकि अधिक से अधिक शिक्षक इसका लाभ उठा सकें।

इस कदम से राज्य के शिक्षा तंत्र में सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है। शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा को आसान बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।

आने वाले समय में इस परीक्षा के सफल आयोजन से प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद की जा रही है। शिक्षक समुदाय ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊमूल रिपोर्ट देखें ↗