यूपी: पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल पर ओपी राजभर की टिप्पणी, कहा- विधायक बनना आईएएस से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओपी राजभर ने पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल को लेकर एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासनिक सेवा में चयन होना विधायक बनने की तुलना में काफी सरल है। राजभर के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया में जनता के बीच जाकर हर व्यक्ति से समर्थन मांगना एक कठिन कार्य है, जबकि आईएएस परीक्षा पास करना केवल पढ़ाई तक सीमित है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के संदर्भ में एक नई बहस छेड़ दी है। अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, राजभर ने प्रशासनिक सेवा और चुनावी राजनीति की तुलना करते हुए कहा कि आईएएस बनना विधायक बनने की तुलना में काफी आसान काम है। उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
राजभर ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए केवल परीक्षा की तैयारी और पढ़ाई की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि एक बार परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद व्यक्ति आईएएस बन जाता है, जो कि उनके अनुसार एक सरल प्रक्रिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक पद प्राप्त करना चुनावी संघर्ष के सामने कुछ भी नहीं है।
मंत्री ने आगे कहा कि विधायक बनना एक अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने के दौरान उम्मीदवार को सीधे जनता के बीच जाना पड़ता है। इस प्रक्रिया में उन्हें हर एक मतदाता के सामने हाथ जोड़कर समर्थन की याचना करनी पड़ती है, जो कि एक बहुत ही विनम्र और कठिन अनुभव होता है।
राजभर के अनुसार, राजनीति में सफलता पाने के लिए केवल योग्यता ही काफी नहीं है, बल्कि जनसंपर्क और लोगों का विश्वास जीतना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि एक रैली आयोजित करके और लोगों के बीच जाकर देख लेने पर ही इस अंतर का वास्तविक अनुभव हो सकता है।
यह टिप्पणी पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल को लेकर की गई है, जिन्होंने हाल ही में प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था। राजभर का यह बयान प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं के बीच अक्सर होने वाली कार्यशैली की तुलना को एक नया मोड़ देता है।
हालांकि, राजभर के इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। उनके समर्थकों का मानना है कि वे जमीनी हकीकत की बात कर रहे हैं, जबकि आलोचक इसे प्रशासनिक सेवा के प्रति एक अनुचित टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब ओपी राजभर अपने बयानों के कारण सुर्खियों में आए हैं। वे अक्सर अपनी बेबाक शैली के लिए जाने जाते हैं और विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटते।
फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में छाया हुआ है। लोग इस पर अपनी अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं कि क्या प्रशासनिक सेवा और चुनावी राजनीति की तुलना करना उचित है या नहीं।