यूपी: बांसकार समाज के लिए बोर्ड का गठन करेगी सरकार, खेती के लिए भूमि पट्टे पर भी विचार
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बांसकार समुदाय के उत्थान के लिए बड़ा आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार बांसकार, धरकार, बांसफोर और बसोर समाज के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए एक समर्पित बोर्ड बनाने पर विचार कर रही है। इसके अलावा, इन समुदायों को खेती के लिए भूमि पट्टे पर उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने बांसकार समुदाय के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने के संकेत दिए हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में जानकारी दी कि सरकार बांसकार, धरकार, बांसफोर और बसोर समाज के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इन समुदायों के सामाजिक और आर्थिक स्तर को ऊपर उठाने के लिए एक विशेष बोर्ड का गठन किया जाएगा।
केशव मौर्य ने बताया कि इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य इन समुदायों की समस्याओं का समाधान करना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सरकार इन वर्गों के सशक्तीकरण के लिए हर संभव प्रयास कर रही है ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाया जा सके।
बोर्ड के गठन के अलावा, सरकार इन समुदायों के लिए भूमि आवंटन पर भी विचार कर रही है। उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बांसकार और संबंधित समुदायों के लोगों को खेती करने के लिए भूमि पट्टे पर देने की योजना पर गंभीरता से काम चल रहा है। इससे इन परिवारों को अपनी आजीविका सुधारने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य इन समुदायों को आत्मनिर्भर बनाना है। भूमि पट्टे पर मिलने से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उन्हें कृषि के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
यह निर्णय इन समुदायों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि बोर्ड के माध्यम से इन समुदायों के लिए बनाई गई नीतियां अधिक प्रभावी ढंग से लागू की जा सकेंगी।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार इन समुदायों के उत्थान के लिए अन्य आवश्यक कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि जल्द ही इसे धरातल पर उतारा जा सके।
इस घोषणा से बांसकार और संबंधित समुदायों में सकारात्मक संदेश गया है। सरकार की इस पहल को इन वर्गों के प्रति संवेदनशीलता और उनके विकास के प्रति सरकार की गंभीरता के रूप में देखा जा रहा है।
