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यूपी में टीएसपीसी मुखिया बृजेश गंझू का एनकाउंटर, अपराधों की लंबी फेहरिस्त और राजनीति में भी आजमाया भाग्य

उत्तर प्रदेश में यूपी एटीएस के साथ हुई मुठभेड़ में टीएसपीसी का कुख्यात मुखिया बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता मारा गया। वह नाम बदलने और अपनी पहचान छिपाने में माहिर था। उस पर अनगिनत अपराध दर्ज थे और वह पुलिसकर्मियों को अपना निशाना बनाता था। अपराधी होने के साथ-साथ उसने राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाने की कोशिश की थी।

उत्तर प्रदेश में एक बड़ी पुलिस कार्रवाई के दौरान टीएसपीसी (तृतीय प्रस्तुति कमेटी) के प्रमुख बृजेश गंझू को मार गिराया गया। यह मुठभेड़ यूपी एटीएस के साथ हुई। बृजेश गंझू, जिसे गोपाल सिंह भोक्ता के नाम से भी जाना जाता था, लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था।

बृजेश गंझू की पहचान केवल एक अपराधी के रूप में नहीं थी, बल्कि वह अपनी पहचान बदलने में भी बेहद माहिर था। वह अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करके कानून की आंखों में धूल झोंकता रहा। उसके खिलाफ दर्ज अपराधों की सूची काफी लंबी है, जिसमें हत्या, जबरन वसूली और अन्य गंभीर मामले शामिल हैं।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बृजेश गंझू के निशाने पर अक्सर पुलिसकर्मी रहते थे। वह सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता था। उसकी गतिविधियों ने राज्य में कानून-व्यवस्था के लिए कई चुनौतियां पैदा की थीं।

दिलचस्प बात यह है कि अपराध की दुनिया में सक्रिय रहने के बावजूद, बृजेश गंझू ने राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाने का प्रयास किया था। उसने चुनावी मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कोशिश की थी, जो उसके बहुआयामी और विवादास्पद व्यक्तित्व को दर्शाता है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी एटीएस के साथ हुई इस मुठभेड़ ने उसके आतंक के अध्याय को समाप्त कर दिया है। पुलिस के लिए यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। उसके खात्मे के साथ ही उन लोगों ने राहत की सांस ली है जो लंबे समय से उसके डर के साये में जी रहे थे।

बृजेश गंझू का अंत उसके द्वारा किए गए अनगिनत अपराधों और पुलिस के साथ उसकी निरंतर दुश्मनी का परिणाम है। प्रशासन अब उसके नेटवर्क और सहयोगियों की जांच में जुट गया है ताकि इस गिरोह की कमर पूरी तरह तोड़ी जा सके।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसीमूल रिपोर्ट देखें ↗