यूपी में बीएलओ को 25 मतदाता बनाने का लक्ष्य, सपा ने 23 अक्तूबर को अवकाश की मांग की
उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया के तहत हर बीएलओ को 20 से 25 नए मतदाता पंजीकृत करने का लक्ष्य दिया गया है। इस बीच, समाजवादी पार्टी ने विरोध जताते हुए 23 अक्तूबर को सार्वजनिक अवकाश की मांग की है। सपा ने ज्ञापन सौंपकर विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक क्षेत्र की 11 सीटों पर होने वाले मतदान के लिए अवकाश घोषित करने का आग्रह किया है।

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच मतदाता सूची को अपडेट करने का काम जोरों पर है। राज्य में हर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को 20 से 25 नए मतदाताओं को पंजीकृत करने का विशेष लक्ष्य सौंपा गया है। इस कवायद का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ना है।
इस बीच, समाजवादी पार्टी ने इस प्रक्रिया और आगामी मतदान को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। पार्टी ने एक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि 23 अक्तूबर को प्रदेश में सार्वजनिक या स्थानीय अवकाश घोषित किया जाए। यह मांग मुख्य रूप से विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक क्षेत्र की 11 सीटों पर होने वाले मतदान के मद्देनजर की गई है।
सपा का तर्क है कि यदि मतदान के दिन अवकाश नहीं होगा, तो संबंधित क्षेत्रों के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं। पार्टी ने सरकार से आग्रह किया है कि लोकतंत्र के इस महापर्व में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अवकाश देना आवश्यक है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, बीएलओ को दिए गए इस लक्ष्य को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा है। मतदाता पंजीकरण की इस प्रक्रिया को लेकर सपा ने अपना विरोध दर्ज कराया है। पार्टी का मानना है कि इस तरह के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है।
विधान परिषद की इन 11 सीटों पर होने वाला चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की प्रक्रिया सामान्य चुनावों से थोड़ी अलग होती है, जिसके लिए विशेष तैयारियों की आवश्यकता होती है। सपा की मांग है कि मतदान के दिन को लेकर प्रशासन को अधिक संवेदनशील होना चाहिए।
फिलहाल, सरकार या चुनाव आयोग की ओर से अवकाश को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, सपा के इस ज्ञापन के बाद प्रशासनिक स्तर पर विचार-विमर्श की संभावना बढ़ गई है। मतदाता पंजीकरण और मतदान की तारीखों को लेकर चल रही यह खींचतान राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन सपा की इस मांग पर क्या रुख अपनाता है। मतदाता पंजीकरण का लक्ष्य पूरा करने के साथ-साथ मतदान प्रतिशत बढ़ाना भी चुनाव आयोग की प्राथमिकता है। इस बीच, राजनीतिक दलों का दबाव चुनाव प्रक्रिया को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
