यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा, दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में होगा मंथन
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावनाओं को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, लखनऊ के बजाय दिल्ली में इस विषय पर निर्णायक चर्चा होने की उम्मीद है। आगामी 30 सितंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की बैठक में दोनों दलों के नेता सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर विचार-विमर्श कर सकते हैं।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की चर्चाएं एक बार फिर जोर पकड़ रही हैं। राज्य में आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए दोनों दलों के बीच तालमेल बिठाने की कवायद शुरू हो गई है। हालांकि, इस गठबंधन की रूपरेखा लखनऊ के बजाय दिल्ली में तय होने की संभावना अधिक है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, गठबंधन के भविष्य को लेकर दिल्ली में अहम बैठक होने वाली है। इंडिया गठबंधन के मंच पर सपा और कांग्रेस के शीर्ष नेता एक साथ जुटेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर रणनीति तैयार करना बताया जा रहा है।
यह बैठक 30 सितंबर को निर्धारित की गई है। माना जा रहा है कि इस चर्चा के दौरान दोनों पार्टियां अपने-अपने दावे और जमीनी स्थिति पर विस्तार से बात करेंगी। गठबंधन के रास्ते खोलने के लिए यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में दोनों दलों के लिए आपसी सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लखनऊ के स्थानीय नेतृत्व के बजाय दिल्ली में केंद्रीय स्तर पर बातचीत होने से गठबंधन की राह आसान हो सकती है। केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप से सीटों के विवाद को सुलझाने में अधिक लचीलापन आने की उम्मीद है।
सपा और कांग्रेस के बीच यह तालमेल आगामी चुनावों में भाजपा को टक्कर देने के उद्देश्य से देखा जा रहा है। गठबंधन के पक्षधर नेताओं का मानना है कि यदि दोनों दल एकजुट होकर चुनाव लड़ते हैं, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ेगा।
हालांकि, अभी तक सीट बंटवारे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। 30 सितंबर की बैठक में होने वाली बातचीत के बाद ही गठबंधन की तस्वीर साफ हो पाएगी। दोनों दलों के कार्यकर्ता और समर्थक इस बैठक के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में गठबंधन की यह कवायद इंडिया गठबंधन की एकता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या दोनों पार्टियां आपसी मतभेदों को भुलाकर एक साझा रणनीति पर सहमत हो पाती हैं या नहीं।