यूपी: राम वनगमन मार्ग निर्माण में लापरवाही पर एक्सईएन रवींद्र पाल सिंह निलंबित, जांच के आदेश
उत्तर प्रदेश में राम वनगमन मार्ग के निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता करने के मामले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) रवींद्र पाल सिंह को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई औतारपुर से सिंगरौर उपरहार के बीच सड़क निर्माण में पाई गई खामियों के बाद की गई है। इसके साथ ही, अधीक्षण अभियंता के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में, राम वनगमन मार्ग के निर्माण में लापरवाही बरतने के आरोप में पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) रवींद्र पाल सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह निर्णय सड़क निर्माण की खराब गुणवत्ता की शिकायतों के बाद लिया गया है।
विभागीय जांच में यह पाया गया कि औतारपुर से सिंगरौर उपरहार के बीच सड़क निर्माण के मानकों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया था। निर्माण कार्य में बरती गई इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों ने निलंबन की कार्रवाई की है। यह मार्ग धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इसके निर्माण में किसी भी प्रकार की कोताही को बर्दाश्त नहीं किया गया।
निलंबन के साथ ही, इस मामले में अधीक्षण अभियंता के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि निर्माण कार्य की निगरानी में कहां चूक हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।
राम वनगमन मार्ग परियोजना उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य धार्मिक स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ना है। ऐसे में निर्माण कार्य में गुणवत्ता का अभाव न केवल परियोजना की छवि को प्रभावित करता है, बल्कि जनता के पैसे का भी दुरुपयोग है।
स्थानीय स्तर पर सड़क की खराब स्थिति को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई, जिसके बाद यह कठोर कदम उठाया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी यदि किसी भी निर्माण कार्य में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का जोर पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा तैयार करने पर है।
फिलहाल, निलंबित एक्सईएन के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस घटना ने अन्य विभागों के अधिकारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश दिया है कि निर्माण कार्यों में लापरवाही अब किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगी।