यूपी: साइबर ठगी की रकम रोकने में लापरवाही बरत रहे 14 बैंक, समीक्षा रिपोर्ट में खुलासा
उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के प्रयासों को बैंकों की सुस्ती से झटका लग रहा है। एक संयुक्त समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 14 बैंक साइबर ठगी की रकम को फ्रीज करने में लापरवाही दिखा रहे हैं। इस ढिलाई के कारण साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (सीएफएमसी) की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है और ठगी के शिकार लोगों को राहत मिलने में देरी हो रही है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश में साइबर अपराधों के खिलाफ चल रही लड़ाई में बैंकों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में जारी एक संयुक्त समीक्षा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि प्रदेश के 14 बैंक साइबर ठगी की रकम को रोकने में अपेक्षित सहयोग नहीं दे रहे हैं। इन बैंकों की ओर से दिखाई जा रही लापरवाही के कारण साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (सीएफएमसी) के कामकाज में बाधा आ रही है।
सीएफएमसी का मुख्य उद्देश्य साइबर ठगी की सूचना मिलते ही संबंधित बैंक खातों को तुरंत फ्रीज करना है ताकि ठगी गई रकम को निकाला न जा सके। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, इन 14 बैंकों द्वारा समय पर कार्रवाई न करने से अपराधियों को पैसा निकालने का मौका मिल जाता है। यह स्थिति साइबर सुरक्षा के दावों पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, समीक्षा में पाया गया कि इन बैंकों की आंतरिक प्रक्रियाएं और सूचना साझा करने का तंत्र काफी धीमा है। जब सीएफएमसी की ओर से ठगी की जानकारी दी जाती है, तो बैंक उसे गंभीरता से लेने में देरी करते हैं। इस देरी का सीधा नुकसान उन आम नागरिकों को होता है जिनकी मेहनत की कमाई साइबर अपराधी उड़ा ले जाते हैं।
साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर की व्यवस्था पूरी तरह से बैंकों के त्वरित रिस्पॉन्स पर टिकी है। यदि बैंक समय रहते खाते को ब्लॉक नहीं करते, तो ठगी गई राशि को वापस पाना लगभग असंभव हो जाता है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बैंकों की यह उदासीनता पूरे सिस्टम की प्रभावशीलता को कम कर रही है।
राज्य सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियां लगातार बैंकों के साथ समन्वय बनाने का प्रयास कर रही हैं। इसके बावजूद, इन 14 बैंकों का रवैया चिंताजनक बना हुआ है। समीक्षा रिपोर्ट में इन बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच, बैंकों की यह लापरवाही एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। यदि बैंक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही ढंग से नहीं करते हैं, तो साइबर अपराधियों के हौसले और बुलंद हो सकते हैं।
आने वाले समय में इन बैंकों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की संभावना है ताकि साइबर सुरक्षा के ढांचे को मजबूत किया जा सके। प्रशासन अब इस बात पर जोर दे रहा है कि बैंकों को साइबर अपराधों के प्रति अधिक संवेदनशील और सक्रिय होना होगा।