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यूपी: 3890 परिषदीय स्कूलों के ऊपर से अब भी गुजर रही है बिजली की हाइटेंशन लाइन

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अभी भी 3890 परिषदीय विद्यालयों के ऊपर से खतरनाक बिजली की हाइटेंशन (एचटी) लाइनें गुजर रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन लाइनों को हटाने की मांग लंबे समय से की जा रही है।

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चिंता सामने आई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 3890 स्कूलों के ऊपर से अभी भी बिजली की हाइटेंशन (एचटी) लाइनें गुजर रही हैं। यह स्थिति न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने अब सक्रियता दिखाई है। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों से इन स्कूलों की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह कदम स्कूलों में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

हाइटेंशन लाइनों का स्कूलों के ऊपर से गुजरना लंबे समय से एक विवाद का विषय रहा है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने कई बार इस खतरे के प्रति प्रशासन को आगाह किया है। बिजली की इन लाइनों के कारण स्कूलों के विस्तार और निर्माण कार्यों में भी बाधा आती है।

विभाग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन-किन जिलों में सबसे अधिक स्कूल इस समस्या से प्रभावित हैं। इसके बाद इन लाइनों को हटाने के लिए बिजली विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।

सुरक्षा मानकों के अनुसार, किसी भी शिक्षण संस्थान के ऊपर से हाई-वोल्टेज बिजली की लाइनें नहीं गुजरनी चाहिए। हालांकि, पुराने समय में बने कई स्कूल इस खतरे की जद में आ गए थे।

बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। रिपोर्ट मिलने के बाद, इन लाइनों को हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

स्थानीय प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इस मामले में बिजली विभाग के साथ मिलकर काम करें ताकि जल्द से जल्द इन लाइनों को स्थानांतरित किया जा सके।

उम्मीद की जा रही है कि इस बार विभाग की सख्ती के बाद इन स्कूलों को इस खतरे से मुक्ति मिल सकेगी। अभिभावक भी अब इस दिशा में त्वरित कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि उनके बच्चे सुरक्षित माहौल में शिक्षा प्राप्त कर सकें।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊमूल रिपोर्ट देखें ↗