ताज़ा अपडेटयूपी: 48 साल के दबदबे के बाद शर्मा गुट का सियासी अध्याय समाप्त, अध्यक्ष ने बदला पाला
Vimarsh Naarad TV logoस्वतंत्र डिजिटल न्यूज़Vimarsh–Naarad TVखबर • विमर्श • जनता की आवाज़
डिजिटल संस्करणYouTube
समाचार श्रेणियां

यूपी: 48 साल के दबदबे के बाद शर्मा गुट का सियासी अध्याय समाप्त, अध्यक्ष ने बदला पाला

उत्तर प्रदेश में 48 वर्षों से चले आ रहे शर्मा गुट के राजनीतिक वर्चस्व का अंत हो गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन के अध्यक्ष द्वारा भाजपा में शामिल होने के निर्णय के बाद यह अध्याय समाप्त हो गया है। ओपी शर्मा के निधन के बाद से संगठन में नेतृत्व परिवर्तन का दौर चल रहा था।

यूपी: 48 साल के दबदबे के बाद शर्मा गुट का सियासी अध्याय समाप्त, अध्यक्ष ने बदला पाला
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: Adam Jones from Kelowna, BC, Canada · CC BY-SA 2.0 · Wikimedia Commons

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक लंबे समय से सक्रिय रहे शर्मा गुट का प्रभाव अब समाप्त होता दिख रहा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग पांच दशकों तक अपना दबदबा बनाए रखने वाला यह गुट अब राजनीतिक रूप से बिखर गया है।

इस बदलाव की शुरुआत ओपी शर्मा के निधन के बाद हुई थी। उनके जाने के बाद संगठन की कमान सुरेश कुमार त्रिपाठी को सौंपी गई थी। बाद के घटनाक्रमों में प्रमोद कुमार मिश्रा को कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सुरेश कुमार त्रिपाठी और प्रमोद कुमार मिश्रा, दोनों ही नेता भारतीय जनता पार्टी से टिकट पाने की इच्छा रखते थे। इसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते उन्होंने अपने पुराने संगठन से दूरी बना ली और पाला बदल लिया।

शर्मा गुट का यह राजनीतिक अध्याय 48 वर्षों तक चला। इस दौरान संगठन ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी छाप छोड़ी थी। हालांकि, अब नेतृत्व के भाजपा में शामिल होने के बाद इस गुट की पुरानी पहचान पर सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से राज्य के शिक्षक और कर्मचारी संगठनों की राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा। शर्मा गुट का एक बड़ा आधार अब भाजपा के साथ जुड़ गया है।

संगठन के भीतर भी इस बदलाव को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ सदस्य इसे स्वाभाविक राजनीतिक प्रक्रिया मान रहे हैं, तो कुछ इसे संगठन के सिद्धांतों से समझौता बता रहे हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शर्मा गुट का कोई नया नेतृत्व उभरता है या फिर यह पूरी तरह से इतिहास का हिस्सा बन जाएगा। फिलहाल, इस गुट के समर्थकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश की राजनीति में हो रहे बड़े बदलावों का एक हिस्सा है, जहां पुराने संगठन अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊमूल रिपोर्ट देखें ↗