रक्षाबंधन के लिए नहीं बना था मशहूर गीत 'फूलों का तारों का', फिर भी बना भाई-बहन के प्यार का प्रतीक
बॉलीवुड का सदाबहार गीत 'फूलों का तारों का' आज भी रक्षाबंधन के मौके पर हर किसी की जुबान पर रहता है। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि यह गाना मूल रूप से रक्षाबंधन के त्योहार के लिए नहीं बनाया गया था। इसके बावजूद, यह गीत भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्याय बन चुका है।
VIMARSHNAARAD TVभारत में त्योहारों और बॉलीवुड का गहरा नाता रहा है। रक्षाबंधन जैसे भाई-बहन के पवित्र त्योहार पर भी फिल्म जगत ने कई यादगार गीत दिए हैं। इनमें से सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक 'फूलों का तारों का सबका कहना है' है, जो दशकों बाद भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है।
एंटरटेनमेंट डेस्क के अनुसार, यह गीत फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' का हिस्सा था। दिलचस्प बात यह है कि इस गाने की रचना रक्षाबंधन के त्योहार को ध्यान में रखकर नहीं की गई थी। फिल्म की कहानी और परिस्थितियों के अनुसार इसे तैयार किया गया था, लेकिन समय के साथ यह गीत रक्षाबंधन का अनौपचारिक एंथम बन गया।
इस गाने के दो वर्जन तैयार किए गए थे, जिन्हें लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने अपनी आवाज दी थी। दोनों ही संस्करणों ने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। आज भी रक्षाबंधन के दिन घरों और सार्वजनिक स्थानों पर यह गीत बजना एक परंपरा जैसा हो गया है।
बॉलीवुड ने रक्षाबंधन पर कई अन्य गाने भी बनाए हैं, लेकिन इस गीत की सादगी और इसके बोलों में छिपे भाई-बहन के प्यार ने इसे सबसे अलग खड़ा कर दिया है। यह गीत न केवल फिल्म का हिस्सा है, बल्कि यह भाई-बहन के रिश्ते की भावनाओं को बखूबी बयां करता है।
फिल्मों में अक्सर ऐसे गाने होते हैं जो किसी खास उद्देश्य के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन वे अपनी लोकप्रियता के कारण किसी अन्य संदर्भ में भी जुड़ जाते हैं। 'फूलों का तारों का' इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
आज भी जब रक्षाबंधन का त्योहार आता है, तो यह गीत भाई-बहन के बीच के प्यार और यादों को ताजा कर देता है। यह साबित करता है कि एक अच्छा गीत किसी भी बंधन या उद्देश्य से परे जाकर लोगों के दिलों को छू सकता है।
भले ही इसकी उत्पत्ति रक्षाबंधन के लिए न हुई हो, लेकिन आज यह गीत भाई-बहन के इस त्योहार का एक अभिन्न अंग बन चुका है।