रणदीप हुड्डा का बयान: 'आजादी केवल अहिंसा से नहीं मिली', वीर सावरकर पर फिल्म बनाने को बताया जरूरी
अभिनेता रणदीप हुड्डा को फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' के लिए बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश की आजादी केवल अहिंसा से नहीं मिली, बल्कि इसमें कई अन्य क्रांतिकारियों का भी बड़ा योगदान था। उन्होंने सावरकर के जीवन पर फिल्म बनाने को एक आवश्यक कदम बताया ताकि इतिहास के अनछुए पहलुओं को सामने लाया जा सके।
VIMARSHNAARAD TVअभिनेता रणदीप हुड्डा इन दिनों अपनी फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' के लिए चर्चा में हैं। इस फिल्म के निर्देशन के लिए उन्हें बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का नेशनल अवॉर्ड प्रदान किया गया है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, पुरस्कार मिलने के बाद रणदीप ने वीर सावरकर के जीवन और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बारे में अपने विचार साझा किए।
रणदीप हुड्डा ने कहा कि यह मानना पूरी तरह सही नहीं है कि भारत को आजादी केवल अहिंसा के मार्ग से मिली। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में कई क्रांतिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के इतिहास में वह स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।
सावरकर के जीवन पर फिल्म बनाने के सवाल पर रणदीप ने कहा कि यह एक जरूरी काम था। उन्होंने बताया कि सावरकर की कहानी को पर्दे पर लाना इसलिए आवश्यक था ताकि लोग उनके संघर्ष और देश के प्रति उनके योगदान को समझ सकें। उन्होंने इसे इतिहास के उन पन्नों को पलटने का प्रयास बताया जो अब तक उपेक्षित थे।
अभिनेता ने सुभाष चंद्र बोस का भी जिक्र किया और कहा कि देश की आजादी के लिए कई लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि सावरकर जैसे व्यक्तित्वों के बारे में बात करना और उनके विचारों को लोगों तक पहुंचाना आज के समय में बहुत महत्वपूर्ण है।
रणदीप ने फिल्म के निर्देशन के दौरान आई चुनौतियों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर फिल्म बनाना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन उनका उद्देश्य सावरकर के जीवन के हर पहलू को ईमानदारी से दिखाना था।
पुरस्कार मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए रणदीप ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए बहुत मायने रखता है। उन्होंने अपनी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस फिल्म को बनाने में उनका साथ दिया।
रणदीप हुड्डा का मानना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में रखने का एक सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी फिल्म दर्शकों को भारतीय इतिहास के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर करेगी।