राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में एनजीटी के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में पर्यावरण प्रशासन को मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सामूहिक वैश्विक प्रयासों पर जोर दिया गया। सम्मेलन में 17 देशों के विशेषज्ञों ने भाग लिया और सतत भविष्य के लिए ठोस कार्रवाई का संकल्प लिया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया। 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' विषय पर आधारित इस सम्मेलन में राष्ट्रपति ने पर्यावरण प्रशासन को सुदृढ़ करने में एनजीटी की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने जलवायु सुदृढीकरण के लिए पारंपरिक ज्ञान और समुदाय-आधारित दृष्टिकोणों को अपनाने पर विशेष जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने इस अवसर पर भारत की उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि देश ने अपने गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्यों को निर्धारित समय से पांच साल पहले ही पूरा कर लिया है। उन्होंने सतत शहरी विकास और हरित गतिशीलता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि चर्चाओं का उद्देश्य केवल चुनौतियों की पहचान करना नहीं, बल्कि प्रभावी कानूनी और संस्थागत तंत्र विकसित करना है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पर्यावरण संरक्षण को सतत प्रगति की अनिवार्य शर्त बताया। सम्मेलन के दौरान 'हरित न्यायम' नामक स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
इस दो दिवसीय आयोजन में 17 देशों के न्यायविदों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। तकनीकी सत्रों में सीमा पार पर्यावरणीय चुनौतियों, वन संरक्षण और वैज्ञानिक निगरानी जैसे विषयों पर गहन संवाद हुआ। सम्मेलन का समापन एक न्यायसंगत और लचीले भविष्य के लिए निरंतर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ठोस कार्रवाई के संकल्प के साथ हुआ।
