राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर देश के शिक्षकों को दी शुभकामनाएं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षकों को बधाई दी है। उन्होंने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और उनकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शिक्षकों से नई तकनीक अपनाने और छात्रों में जिज्ञासा विकसित करने का आग्रह किया।

शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने देश के सभी शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने इस अवसर पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति ने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन न केवल एक महान दार्शनिक और लेखक थे, बल्कि एक उत्कृष्ट शिक्षक भी थे।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वे अपने मार्गदर्शन और सहयोग से विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारते हैं। एक शिक्षक का मुख्य दायित्व विद्यार्थी को एक चरित्रवान और बेहतर इंसान के रूप में रूपांतरित करना है।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि एक संवेदनशील और समर्पित शिक्षक विद्यार्थियों की विशिष्ट क्षमताओं की पहचान करता है। ऐसा शिक्षक छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है और उन्हें अपने कार्यों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए सक्षम बनाता है।
राष्ट्रपति ने शिक्षकों को आधुनिक युग के अनुरूप ढलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए निरंतर अपना ज्ञान बढ़ाते रहना चाहिए। इसके साथ ही, शिक्षण की नवीन पद्धतियों को अपनाना भी आवश्यक है।
विद्यार्थियों के विकास पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षकों को छात्रों में स्वतंत्र सोच को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों के भीतर जिज्ञासा का भाव विकसित करने का प्रयास करें।
अंत में, राष्ट्रपति ने देश के सभी समर्पित शिक्षकों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कामना की कि शिक्षक ऐसी प्रबुद्ध पीढ़ियों का निर्माण करें जो देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सक्षम हों।
