रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए भारत हर संभव सहयोग देने को तैयार: विदेश मंत्री जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कीव की अपनी यात्रा के दौरान कहा कि भारत रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत शांति बहाली की दिशा में किसी भी तरह की मदद के लिए तत्पर है। यह बयान वैश्विक स्तर पर भारत की शांतिपूर्ण कूटनीति की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
VIMARSHNAARAD TVविदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन की राजधानी कीव में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि भारत रूस और यूक्रेन के बीच जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत शांति के प्रयासों में किसी भी प्रकार का योगदान देने के लिए पूरी तरह से तत्पर है।
कीव में अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान विदेश मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत इस युद्ध के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही कोशिशों का समर्थन करता है। उनका यह वक्तव्य वैश्विक शांति और स्थिरता के प्रति भारत के रुख को स्पष्ट करता है।
जयशंकर ने कहा कि भारत का मानना है कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही इस जटिल समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने दोहराया कि भारत इस दिशा में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए हमेशा तैयार है।
यूक्रेन के नेतृत्व के साथ चर्चा के दौरान विदेश मंत्री ने भारत की मानवीय सहायता और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करने की नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता हमेशा से ही संघर्ष को कम करने और बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने की रही है।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक चुनौतियों को लेकर चिंतित है। भारत ने शुरू से ही इस बात पर जोर दिया है कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता है।
विदेश मंत्री के इस बयान को वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है। भारत ने पहले भी कई मंचों पर इस बात को दोहराया है कि वह शांति वार्ता को बढ़ावा देने के लिए सभी पक्षों के साथ संपर्क में रहने का पक्षधर है।
कीव में दी गई यह टिप्पणी भारत की उस विदेश नीति का हिस्सा है जिसमें वह वैश्विक संघर्षों में एक तटस्थ और मध्यस्थ की भूमिका निभाने की इच्छा रखता है। भारत का लक्ष्य हमेशा से ही शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन को बढ़ावा देना रहा है।
अंत में, विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की ओर से दी जाने वाली किसी भी प्रकार की मदद का उद्देश्य केवल युद्ध को समाप्त करना और क्षेत्र में शांति बहाल करना है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस दिशा में एकजुट होकर प्रयास करने का आह्वान किया।