लखनऊ की कुकरैल नाइट सफारी परियोजना में कानूनी अड़चनें, नए सिरे से योजना तैयार करने की मांग
लखनऊ की बहुप्रतीक्षित कुकरैल नाइट सफारी परियोजना एक बार फिर कानूनी पेचीदगियों में फंस गई है। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने परियोजना की मूल योजना के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को खारिज कर दिया है, जिसमें चिड़ियाघर का स्थानांतरण, चार लेन की सड़क और एडवेंचर जोन शामिल हैं। अब प्रशासन के सामने इस पूरी योजना को नए सिरे से तैयार करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी परियोजना को लेकर कानूनी संकट गहरा गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को लेकर फिर से कानूनी पेंच फंस गए हैं, जिसके कारण अब पूरी कार्ययोजना को नए सिरे से बनाने की मांग उठ रही है। यह स्थिति परियोजना के भविष्य पर सवालिया निशान लगा रही है।
परियोजना की मूल रूपरेखा में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित थे। इनमें मुख्य रूप से मौजूदा चिड़ियाघर को दूसरी जगह स्थानांतरित करना, क्षेत्र में चार लेन की सड़क का निर्माण और एक विशेष एडवेंचर जोन विकसित करना शामिल था। इन सुविधाओं के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना थी, लेकिन अब ये सभी बिंदु विवाद के घेरे में आ गए हैं।
केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने इन तीनों प्रमुख प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है। समिति के इस निर्णय के बाद परियोजना का काम आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया है। सीईसी की आपत्तियों के बाद अब प्रशासन को यह तय करना होगा कि वे किस तरह से इन बाधाओं को दूर करते हुए परियोजना को आगे ले जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन हिस्सों को खारिज किए जाने के बाद अब नाइट सफारी का स्वरूप पूरी तरह से बदल सकता है। चिड़ियाघर के स्थानांतरण और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर लगी रोक ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। अब एक नई और संशोधित योजना तैयार करना ही एकमात्र विकल्प बचा है जो कानूनी मानकों पर खरा उतर सके।
लखनऊ के विकास के लिए इस नाइट सफारी को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। हालांकि, कानूनी अड़चनों के कारण अब इसके पूरा होने की समयसीमा पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन अब इस मामले में कानूनी सलाह लेने और नई कार्ययोजना पर विचार करने की प्रक्रिया में है ताकि परियोजना को बचाया जा सके।
फिलहाल, कुकरैल नाइट सफारी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशासन किस तरह से सीईसी की आपत्तियों का समाधान करता है। नए सिरे से योजना बनाने की मांग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि परियोजना के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। लखनऊ के निवासियों और पर्यटकों को इस सुविधा के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।