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लखनऊ के गाजीपुर थाने में 11 महीने तक मेहमान बनकर रहा केन्याई युवक, पुलिस ने की खातिरदारी

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, केन्या के नैरोबी निवासी मॉरिस ओकोथ को लखनऊ के गाजीपुर थाने की पुलिस ने करीब 11 महीने तक अपने संरक्षण में रखा। पुलिस ने इस दौरान युवक की मेहमान की तरह देखभाल की। यह मामला तब चर्चा में आया जब पुलिस की मानवीय संवेदना और अतिथि सत्कार की अनूठी मिसाल सामने आई, जिसने स्थानीय स्तर पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहाँ पुलिस की मानवीय छवि देखने को मिली। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, केन्या के नैरोबी शहर का रहने वाला मॉरिस ओकोथ करीब 11 महीनों तक लखनऊ के गाजीपुर थाने में रहा। इस दौरान पुलिस ने उसे किसी कैदी की तरह नहीं, बल्कि एक मेहमान की तरह रखा और उसकी पूरी देखभाल की।

बताया गया है कि मॉरिस ओकोथ किसी कारणवश लखनऊ में रुक गया था और उसे वापस जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इस स्थिति को देखते हुए गाजीपुर थाने की पुलिस ने जिम्मेदारी उठाते हुए उसे अपने संरक्षण में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने न केवल उसके रहने की व्यवस्था की, बल्कि उसके खान-पान और अन्य जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखा।

थाने में तैनात पुलिसकर्मियों ने मॉरिस के साथ बहुत ही सौहार्दपूर्ण व्यवहार किया। लगभग एक साल तक चले इस प्रवास के दौरान, पुलिस ने उसे एक अतिथि के रूप में सम्मान दिया। यह घटना पुलिस विभाग के मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है, जहाँ कानून के रखवालों ने एक विदेशी नागरिक की मदद के लिए आगे बढ़कर मिसाल पेश की।

स्थानीय स्तर पर इस घटना की काफी चर्चा हो रही है। लोग पुलिस की इस मेहमाननवाजी की सराहना कर रहे हैं। अक्सर पुलिस को केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसी के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस मामले ने पुलिस के संवेदनशील पक्ष को उजागर किया है। मॉरिस ओकोथ के लिए यह अनुभव निश्चित रूप से यादगार रहा होगा।

पुलिस की इस पहल ने यह साबित किया कि संकट के समय में मदद करना सबसे बड़ा धर्म है। गाजीपुर थाने के अधिकारियों और कर्मचारियों ने जिस तरह से मॉरिस का ख्याल रखा, वह समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है। यह मामला अब सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में भी काफी सुर्खियां बटोर रहा है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01सै. सगीर अब्बास रिजवी, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊमूल रिपोर्ट देखें ↗