लखनऊ: पूर्व मंत्री भगवती सिंह के परिजनों को रिवर बैंक कॉलोनी का सरकारी बंगला खाली करने का अंतिम नोटिस
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नगर निगम प्रशासन ने पूर्व मंत्री भगवती सिंह के परिवार को रिवर बैंक कॉलोनी स्थित सरकारी आवास खाली करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने आवंटन रद्द करते हुए परिजनों को सात दिनों के भीतर बंगला खाली करने का अंतिम नोटिस सौंपा है। यह कार्रवाई नगर निगम की संपत्ति को वापस लेने की प्रक्रिया के तहत की गई है।
VIMARSHNAARAD TVलखनऊ में नगर निगम प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पूर्व मंत्री भगवती सिंह के परिजनों को रिवर बैंक कॉलोनी स्थित सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दिया है। नगर निगम की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस आवास का आवंटन अब रद्द कर दिया गया है। प्रशासन ने संबंधित परिवार को सात दिनों के भीतर परिसर खाली करने का अंतिम नोटिस जारी किया है।
रिवर बैंक कॉलोनी में स्थित यह बंगला नगर निगम की संपत्ति है। लंबे समय से इस आवास का उपयोग पूर्व मंत्री के परिवार द्वारा किया जा रहा था। हालांकि, अब नगर निगम ने इस आवंटन को समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन और उनके उचित उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
नगर निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह नोटिस अंतिम चेतावनी के रूप में भेजा गया है। यदि निर्धारित सात दिनों की समय सीमा के भीतर बंगला खाली नहीं किया जाता है, तो प्रशासन नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। इस प्रक्रिया के तहत संपत्ति का कब्जा वापस लेने के लिए बल प्रयोग या अन्य प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।
पूर्व मंत्री भगवती सिंह के निधन के बाद से ही उनके परिजनों के पास यह सरकारी आवास था। नगर निगम प्रशासन ने अब इस आवंटन को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद अब संबंधित परिवार को वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
नगर निगम की इस कार्रवाई को सरकारी आवासों के आवंटन नियमों के सख्ती से पालन के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि नियमों के दायरे में रहकर ही यह नोटिस जारी किया गया है। स्थानीय प्रशासन अब इस मामले में आगे की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
इस घटनाक्रम के बाद रिवर बैंक कॉलोनी में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। नगर निगम की ओर से दी गई सात दिनों की मोहलत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवार किस प्रकार से इस आदेश का पालन करता है। फिलहाल, प्रशासन ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और अब गेंद संबंधित परिवार के पाले में है।