लखनऊ में अवैध निर्माण पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में, आठ हजार से अधिक ध्वस्तीकरण आदेश फाइलों में दबे
लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि शहर में आठ हजार से अधिक ध्वस्तीकरण आदेश फाइलों में दबे हुए हैं। गोलागंज के बारूदखाना इलाके में स्थित एक छह मंजिला अवैध अपार्टमेंट का मामला सामने आया है, जहां दो साल पहले अवैध पेंट हाउस निर्माण के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि वसूली के खेल के चलते जिम्मेदार अधिकारी इन आदेशों को दबाए बैठे हैं।
VIMARSHNAARAD TVलखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ जारी किए गए आठ हजार से अधिक ध्वस्तीकरण आदेश फाइलों में ही दबे रह गए हैं। अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, इन आदेशों पर अमल न होने के पीछे वसूली का खेल चल रहा है, जिससे अवैध निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
इस मामले का खुलासा गोलागंज के बारूदखाना स्थित एसए अपार्टमेंट के उदाहरण से हुआ है। यह छह मंजिला इमारत पूरी तरह से अवैध बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, इस अपार्टमेंट की छठी मंजिल पर दो साल पहले अवैध तरीके से पेंट हाउस का निर्माण कार्य शुरू किया गया था।
अवैध निर्माण की जानकारी होने के बावजूद एलडीए के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। आरोप है कि अधिकारियों ने मिलीभगत कर ध्वस्तीकरण के आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस तरह की लापरवाही से शहर में अवैध निर्माणों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि केवल एक अपार्टमेंट ही नहीं, बल्कि शहर भर में हजारों ऐसी फाइलें हैं जिन पर कार्रवाई लंबित है। इन फाइलों के दबे रहने से न केवल सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि शहर की नियोजित विकास व्यवस्था भी चरमरा गई है।
अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई न होने से आम जनता में भी रोष है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किन कारणों से एलडीए के अधिकारी इन अवैध निर्माणों को संरक्षण दे रहे हैं। क्या यह केवल प्रशासनिक शिथिलता है या इसके पीछे कोई बड़ा आर्थिक खेल है, यह जांच का विषय है।
फिलहाल, इस मामले ने एलडीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। यदि समय रहते इन आठ हजार से अधिक आदेशों पर अमल नहीं किया गया, तो शहर में अवैध निर्माणों का जाल और अधिक फैल सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है।