लखनऊ में रेफरल नीति का अभाव, बेड की उपलब्धता जाने बिना ही मरीजों को भेजा जा रहा रेफर
लखनऊ के अस्पतालों में गंभीर मरीजों को उच्च केंद्रों पर भेजने के लिए रेफरल नीति तो तैयार की गई है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक ढांचा अभी भी नदारद है। स्थिति यह है कि 90 फीसदी मामलों में मरीज को बिना बेड की उपलब्धता सुनिश्चित किए ही रेफर कर दिया जाता है, जिससे उन्हें इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ता है।
लखनऊ के स्वास्थ्य तंत्र में गंभीर मरीजों के रेफरल को लेकर बड़ी अव्यवस्था सामने आई है। हालांकि प्रशासन ने मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेजने हेतु एक रेफरल नीति बनाई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। इस नीति को लागू करने के लिए जिस बुनियादी ढांचे की आवश्यकता थी, वह अब तक तैयार नहीं हो सका है।
विनीत चतुर्वेदी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया में भारी खामियां हैं। लगभग 90 प्रतिशत मामलों में, मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजने से पहले वहां बेड खाली होने की जानकारी तक नहीं ली जाती। इसके परिणामस्वरूप, मरीज जब रेफर किए गए अस्पताल पहुंचते हैं, तो उन्हें बेड न मिलने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
यह स्थिति मरीजों और उनके परिजनों के लिए बेहद कष्टकारी साबित हो रही है। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्हें इलाज के लिए भटकना पड़ता है, जिससे समय पर उपचार मिलने की संभावना कम हो जाती है। रेफरल के दौरान समन्वय की कमी साफ तौर पर देखी जा सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रेफरल नीति का मुख्य उद्देश्य मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक निर्बाध रूप से पहुंचाना था। लेकिन उचित संचार प्रणाली और बेड ट्रैकिंग सिस्टम के अभाव में यह नीति केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है।
अस्पतालों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान न होने से मरीजों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है। जब तक अस्पताल यह सुनिश्चित नहीं करते कि मरीज को जहां भेजा जा रहा है, वहां बेड उपलब्ध है या नहीं, तब तक रेफरल की यह प्रक्रिया मरीजों के लिए जोखिम भरी बनी रहेगी।
इस समस्या के समाधान के लिए एक एकीकृत तंत्र की आवश्यकता है, जो वास्तविक समय में बेड की उपलब्धता की जानकारी दे सके। रेफरल करने वाले डॉक्टरों और प्राप्त करने वाले अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल ही इस संकट को कम कर सकता है।
प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग उठ रही है ताकि मरीजों को अनावश्यक धक्के न खाने पड़ें। रेफरल नीति का सही क्रियान्वयन ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार ला सकता है।
अंत में, लखनऊ के अस्पतालों में रेफरल के दौरान बरती जा रही यह लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य विभाग को जल्द से जल्द इस व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत है ताकि हर मरीज को समय पर उचित इलाज मिल सके।
