लखनऊ: शिक्षिका विनीता को मिला राज्य अध्यापक पुरस्कार, बच्चों के भविष्य पर खर्च करेंगी सम्मान राशि
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोसाईगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय अमेठी उर्दू की शिक्षिका विनीता को राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। पुरस्कार मिलने के बाद शिक्षिका ने विनम्रता दिखाते हुए कहा कि इस सम्मान की असली हकदार उनके विद्यार्थी हैं और वे पुरस्कार में मिली राशि को उन्हीं के शैक्षिक विकास पर खर्च करेंगी।
VIMARSHNAARAD TVलखनऊ के गोसाईगंज क्षेत्र में स्थित प्राथमिक विद्यालय अमेठी उर्दू की शिक्षिका विनीता को राज्य अध्यापक पुरस्कार से नवाजा गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदान किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान और समर्पण को देखते हुए उन्हें इस पुरस्कार के लिए चुना गया था।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद शिक्षिका विनीता ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए एक प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार की असली हकदार वे स्वयं नहीं, बल्कि उनके विद्यालय के बच्चे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरस्कार के रूप में उन्हें जो भी राशि मिली है, उसे वे अपने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और उनकी शिक्षा से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने पर ही खर्च करेंगी।
शिक्षिका का यह निर्णय न केवल उनके छात्रों के प्रति उनके लगाव को दर्शाता है, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी पेश करता है। एक शिक्षक के रूप में उनका यह समर्पण शिक्षा जगत में सराहना का विषय बना हुआ है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह सम्मान राज्य स्तर पर उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने शिक्षण कार्य में नवाचार और निष्ठा का परिचय दिया हो। विनीता का कार्यक्षेत्र प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाने पर केंद्रित रहा है।
मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर भी शिक्षिका की काफी प्रशंसा हो रही है। उनके सहकर्मियों और अभिभावकों ने भी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया है।
विनीता का मानना है कि बच्चों की प्रगति ही एक शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। पुरस्कार राशि को बच्चों पर खर्च करने का उनका संकल्प उनके सेवा भाव को उजागर करता है।
यह घटना लखनऊ के शैक्षिक वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाली है। प्राथमिक विद्यालय अमेठी उर्दू की शिक्षिका का यह कदम अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।