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लखीमपुर खीरी तिकुनिया हिंसा मामला: पांच साल में आठ गवाह अपने बयानों से पलटे, सुरक्षा पर उठे सवाल

अक्टूबर 2021 में लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में हुई हिंसक घटना के पांच साल बाद कानूनी प्रक्रिया में नई चुनौतियां सामने आई हैं। विनीत सक्सेना की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान आठ गवाह अपने बयानों से मुकर गए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मोनू के खिलाफ एसआईटी की जांच और चार्जशीट पर सुनवाई अभी भी जारी है। इस घटना में चार किसानों और एक पत्रकार की जान गई थी।

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में अक्टूबर 2021 में हुई दुखद हिंसा की घटना एक बार फिर चर्चा में है। विनीत सक्सेना की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में कानूनी कार्यवाही के दौरान गवाहों के पलटने का सिलसिला चिंता का विषय बना हुआ है। पिछले पांच वर्षों में कुल आठ गवाह अपने पूर्व बयानों से पीछे हट चुके हैं।

यह घटना उस समय हुई थी जब क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल था। इस हिंसा में चार किसानों और एक पत्रकार की जान चली गई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। घटना के बाद से ही मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी द्वारा गहन जांच की गई थी।

वर्तमान में, पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र आशीष मोनू के विरुद्ध दायर चार्जशीट पर अदालत में सुनवाई चल रही है। कानूनी जानकारों का मानना है कि गवाहों के मुकरने से मामले की दिशा और न्याय प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि गवाहों को सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और गनर हटाए जाने की खबरों के बीच गवाहों का अपने बयानों से पलटना एक गंभीर कानूनी मोड़ है।

न्यायिक प्रक्रिया के तहत अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इन परिस्थितियों में किस प्रकार आगे बढ़ती है। पीड़ित परिवारों को लंबे समय से न्याय का इंतजार है और इस तरह की घटनाएं प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना रही हैं।

एसआईटी ने अपनी जांच में जो साक्ष्य जुटाए थे, उन पर अब अदालत में बहस जारी है। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच कानूनी दांव-पेच के बीच यह मामला एक संवेदनशील स्थिति में पहुंच गया है।

तिकुनिया कांड से जुड़े सभी पक्षों की नजरें अब आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। प्रशासन और न्यायपालिका के लिए यह सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है कि गवाहों की सुरक्षा बनी रहे और मामले का निष्पक्ष निपटारा हो सके।