लुंगी के ग्लव्स बनाकर भाइयों से लड़ती थीं रोशिबिना देवी, आज एशियाई खेलों में पदक जीतकर रचा इतिहास
एशियाई खेलों में देश का नाम रोशन करने वाली रोशिबिना देवी ने अपने संघर्षपूर्ण सफर के बारे में एनडीटीवी से बात की है। उन्होंने बताया कि बचपन में वे लुंगी को ग्लव्स बनाकर अपने भाइयों के साथ बॉक्सिंग का अभ्यास करती थीं। जैकी चैन और ब्रूस ली की फिल्मों से प्रेरित होकर उन्होंने खेल की दुनिया में कदम रखा और आज वे एक सफल एथलीट बन चुकी हैं।
VIMARSHNAARAD TVएशियाई खेलों में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाली रोशिबिना देवी का सफर बेहद प्रेरणादायक है। एनडीटीवी के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि खेल के प्रति उनका जुनून बहुत पहले ही शुरू हो गया था।
रोशिबिना ने खुलासा किया कि बचपन में वे जैकी चैन और ब्रूस ली की फिल्में बहुत देखती थीं। इन फिल्मों के एक्शन दृश्यों ने उन्हें काफी प्रभावित किया था। इसी प्रेरणा के चलते वे घर पर ही अभ्यास शुरू कर देती थीं।
उन्होंने बताया कि उनके पास बॉक्सिंग ग्लव्स नहीं थे, इसलिए वे लुंगी का इस्तेमाल करके ग्लव्स बनाती थीं। इसके बाद वे अपने भाइयों के साथ बॉक्सिंग का मुकाबला करती थीं। यह उनके खेल के प्रति शुरुआती लगाव का दौर था।
उनके पिता ने जब उन्हें भाइयों के साथ लड़ते हुए देखा, तो उन्हें रोशिबिना की प्रतिभा का एहसास हुआ। उन्होंने ही रोशिबिना को खेल की दुनिया में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया और उनका समर्थन किया।
आज रोशिबिना देवी ने तीन एशियाई खेलों में पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उनका यह सफर यह साबित करता है कि अगर दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद सफलता हासिल की जा सकती है।
रोशिबिना की कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो खेल के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से न केवल अपने परिवार का बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है।
उनकी यह यात्रा लुंगी के ग्लव्स से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची है। रोशिबिना का कहना है कि खेल के प्रति उनका समर्पण ही उन्हें आज इस मुकाम तक लेकर आया है।
आने वाले समय में रोशिबिना से और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। उनकी सफलता की कहानी कई लोगों को प्रेरित करने का काम कर रही है।