ताज़ा अपडेटलोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्व अध्यक्ष बली राम भगत को उनकी जयंती पर दी श्रद्धांजलि
Vimarsh Naarad TV logoस्वतंत्र डिजिटल न्यूज़Vimarsh–Naarad TVखबर • विमर्श • जनता की आवाज़
डिजिटल संस्करणYouTube
समाचार श्रेणियां

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्व अध्यक्ष बली राम भगत को उनकी जयंती पर दी श्रद्धांजलि

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संविधान सदन में पूर्व अध्यक्ष बली राम भगत को उनकी जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की। श्री भगत एक स्वतंत्रता सेनानी और अनुभवी सांसद थे, जिन्होंने पांचवीं लोक सभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री और राजस्थान व हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में भी राष्ट्र की सेवा की।

आधिकारिक स्रोत की पोस्ट: X

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में पूर्व लोक सभा अध्यक्ष बली राम भगत की जयंती के अवसर पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम में लोक सभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने भी श्री भगत को पुष्पांजलि दी।

स्वतंत्रता सेनानी रहे बली राम भगत का संसदीय करियर अत्यंत लंबा और प्रभावशाली रहा। वे 1950 में प्रोविजनल पार्लियामेंट के लिए चुने गए थे और इसके बाद पहली से पांचवीं, सातवीं तथा आठवीं लोक सभा के सदस्य रहे। उन्होंने कुल सात बार लोक सभा में जनता का प्रतिनिधित्व किया।

जनवरी 1976 में उन्हें पांचवीं लोक सभा का अध्यक्ष चुना गया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सदन की मर्यादा और निष्पक्षता पर विशेष जोर दिया। उनका मानना था कि अध्यक्ष सदन का सेवक होता है और उसे सभी वर्गों के प्रति समान व्यवहार करना चाहिए।

श्री भगत ने केंद्र सरकार में विदेश, वित्त, रक्षा और योजना जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। इसके अलावा, उन्होंने हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। उनका निधन 2 जनवरी 2011 को नई दिल्ली में हुआ था।

उनके अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान संसदीय प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए। मार्च 1976 में सरकारी आश्वासनों पर अध्यक्षों की समिति का पहला सम्मेलन आयोजित हुआ। साथ ही, उन्होंने संसदीय अध्ययन और प्रशिक्षण के लिए एक संस्थान की स्थापना में भी भूमिका निभाई।

ओम बिरला ने श्री भगत को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण तक समर्पित रहा। संसदीय अनुशासन और नियमों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

श्री भगत की कार्यशैली में संसदीय प्रक्रियाओं की गहरी समझ और व्यवस्था के प्रति दृढ़ता स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। कठिन परिस्थितियों में भी वे संयम बनाए रखते थे, जिससे सदन के सभी वर्गों में उनका सम्मान था।

उनकी विरासत केवल कानून निर्माण तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने संसद को ज्ञान और क्षमता निर्माण के केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया। राष्ट्रसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।

स्रोत

मूल संदर्भ

01Press Information Bureauमूल रिपोर्ट देखें ↗