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वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम: सीमावर्ती गांवों का कायाकल्प और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती

वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम के माध्यम से भारत सरकार सीमावर्ती गांवों को विकास के केंद्रों में बदल रही है। 11,639 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य बुनियादी ढांचे में सुधार, आजीविका के अवसर पैदा करना और सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।

वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम: सीमावर्ती गांवों का कायाकल्प और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती
आधिकारिक स्रोत का चित्र: Press Information Bureau, Government of India · PIB reusable material · Press Information Bureau

वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम (VVP) ने भारत के सीमावर्ती गांवों की भूमिका को पूरी तरह बदल दिया है। अब ये गांव केवल सुदूर चौकियां नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास में रणनीतिक साझेदार बन गए हैं। 11,639 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ, यह कार्यक्रम सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर रहा है।

भारत अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर 15,000 किलोमीटर से अधिक का क्षेत्र साझा करता है। दशकों तक, दुर्गम भूभाग और कनेक्टिविटी की कमी के कारण ये क्षेत्र अलग-थलग थे। 2023 में शुरू हुआ यह कार्यक्रम इन बस्तियों को देश का 'अंतिम गांव' नहीं, बल्कि 'पहला गांव' मानकर उनके समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

यह कार्यक्रम दो चरणों में लागू किया जा रहा है। VVP-I उत्तरी सीमा के गांवों पर केंद्रित है, जिसे 2023 में अरुणाचल प्रदेश से लॉन्च किया गया था। वहीं, VVP-II को 2026 में असम से शुरू किया गया, जो अन्य सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को कवर करता है। दोनों चरणों का लक्ष्य 2,616 से अधिक गांवों को सशक्त बनाना है।

सरकार का उद्देश्य सीमावर्ती समुदायों को सुरक्षित और समृद्ध बनाना है। इसके तहत 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के जरिए आजीविका सहायता, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जुलाई 2026 तक, गृह मंत्रालय ने 3,020 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें सड़कें और पुल शामिल हैं।

पर्यटन इस कार्यक्रम का एक प्रमुख हिस्सा बनकर उभरा है। व्यूप्वाइंट्स, इको-रिसॉर्ट्स और ट्रेक रूट्स के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। इसके अलावा, जागरूकता अभियानों और कौशल प्रशिक्षण के जरिए निवासियों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से, एक आत्मनिर्भर सीमावर्ती आबादी राष्ट्र के लिए एक बड़ी संपत्ति है। अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में, सुरक्षा बल स्थानीय स्तर पर ही दूध और सब्जियां खरीद रहे हैं, जिससे गांव वालों को सुनिश्चित बाजार मिल रहा है।

यह कार्यक्रम ग्राम कार्य योजनाओं के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जो स्थानीय आवश्यकताओं को प्राथमिकता देती हैं। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति आवश्यकतानुसार दिशानिर्देशों में ढील देने का अधिकार रखती है, ताकि विकास कार्यों में कोई बाधा न आए।

अंततः, वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम का लक्ष्य 2047 तक एक विकसित भारत की नींव रखना है। बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों के साथ, ये गांव न केवल अपनी स्थिति सुधार रहे हैं, बल्कि देश की सीमाओं की सुरक्षा को भी अभेद्य बना रहे हैं।

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