वाराणसी की सुमेधा पाठक का संघर्ष: टीबी से व्हीलचेयर तक का सफर, अब पैरा एशियाई निशानेबाजी में दिखाएंगी दम
वाराणसी की रहने वाली सुमेधा पाठक ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए निशानेबाजी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। टीबी के कारण व्हीलचेयर तक सीमित होने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। हाल ही में कोरिया में आयोजित 10 मीटर पिस्टल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अब उनकी नजरें 2026 के पैरा एशियाई खेलों में पदक जीतने पर टिकी हैं।
VIMARSHNAARAD TVवाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित मानस नगर एक्सटेंशन की निवासी सुमेधा पाठक ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हौसलों को बुलंद रखा है। एक समय टीबी की बीमारी के कारण उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा, जिससे उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। हालांकि, उन्होंने अपनी शारीरिक सीमाओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और निशानेबाजी के खेल में अपना भविष्य तलाशना शुरू किया।
सुमेधा की मेहनत का परिणाम हाल ही में कोरिया में देखने को मिला। वहां आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने 10 मीटर पिस्टल टीम स्पर्धा में हिस्सा लिया और शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सुमेधा की यह सफलता उनके दृढ़ संकल्प का परिणाम है। बीमारी के बाद भी उन्होंने खेल के प्रति अपना जुनून कम नहीं होने दिया। उनके कोच और परिवार के सदस्यों ने भी इस कठिन सफर में उनका पूरा साथ दिया है।
अब सुमेधा का अगला लक्ष्य 2026 में होने वाले पैरा एशियाई खेल हैं। वह इन खेलों की तैयारी में पूरी शिद्दत से जुटी हुई हैं। उनकी सफलता उन सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो जीवन में किसी न किसी शारीरिक चुनौती का सामना कर रहे हैं।
निशानेबाजी के क्षेत्र में सुमेधा का यह सफर अभी शुरू हुआ है। जिस तरह से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बनाई है, उससे उम्मीद है कि आने वाले समय में वह देश के लिए और भी पदक जीतेंगी।
उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा हो, तो कोई भी बाधा रास्ते में नहीं आ सकती। सुमेधा की सफलता की चर्चा अब हर तरफ हो रही है और लोग उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में सुमेधा की तैयारी और उनके प्रदर्शन पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। वह अपनी मेहनत और एकाग्रता के दम पर खेल जगत में एक बड़ा नाम बनने की ओर अग्रसर हैं।