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वाराणसी के आश्रम में रह रहीं 125 बेसहारा महिलाएं, परिजनों ने साथ रखने से किया इनकार

वाराणसी के एक आश्रम में संपन्न परिवारों से ताल्लुक रखने वाली 125 महिलाएं रह रही हैं, जिन्हें उनके अपने परिजनों ने सड़क पर छोड़ दिया था। आश्रम प्रशासन और प्रोबेशन विभाग ने इन महिलाओं की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन का सहारा लिया। हालांकि, जब अधिकारियों ने उनके परिवारों से संपर्क किया, तो उन्होंने इन महिलाओं को वापस घर ले जाने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया।

वाराणसी में एक हृदयविदारक स्थिति सामने आई है, जहां 125 महिलाएं एक आश्रम में आश्रय लेने को मजबूर हैं। ये सभी महिलाएं संपन्न और प्रतिष्ठित परिवारों से आती हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें उनके ही अपनों ने बेसहारा छोड़ दिया था। सड़क पर भटकती मिली इन महिलाओं को आश्रम में शरण दी गई, जहां वे अब अपना जीवन व्यतीत कर रही हैं।

इन महिलाओं की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी। इस कार्य को पूरा करने के लिए आश्रम प्रशासन और प्रोबेशन विभाग के अधिकारियों ने आधुनिक तकनीक का उपयोग किया। फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से इन महिलाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई गईं, जिससे उनके मूल पते और परिवारों तक पहुंचना संभव हो सका।

अधिकारियों ने पूरी तत्परता दिखाते हुए इन महिलाओं के परिजनों से संपर्क स्थापित किया। उन्हें उम्मीद थी कि परिवार के लोग अपनी जिम्मेदारी समझेंगे और इन महिलाओं को सम्मान के साथ वापस घर ले जाएंगे। लेकिन, अधिकारियों का यह प्रयास विफल रहा क्योंकि परिजनों ने इन महिलाओं को अपने साथ रखने से साफ तौर पर इनकार कर दिया।

परिजनों के इस रुख ने समाज के एक कड़वे सच को उजागर किया है। संपन्न परिवारों से होने के बावजूद, इन महिलाओं को उनके अपने ही लोगों ने ठुकरा दिया है। यह स्थिति न केवल इन महिलाओं के लिए पीड़ादायक है, बल्कि सामाजिक संवेदनाओं पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

फिलहाल, ये महिलाएं आश्रम में ही रह रही हैं। प्रशासन और आश्रम प्रबंधन अब उनके भविष्य और सुरक्षा को लेकर आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। यह मामला उन महिलाओं की दुर्दशा को दर्शाता है जो अपने ही घरों में उपेक्षा का शिकार होकर सड़कों पर आने को मजबूर हो गईं।

अधिकारियों का कहना है कि वे इन महिलाओं के पुनर्वास के लिए अन्य विकल्पों पर काम कर रहे हैं। हालांकि, परिजनों द्वारा अपनाए गए इस कठोर रवैये के कारण स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है।

यह घटना वाराणसी में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इस बात से हैरान हैं कि कैसे संपन्न परिवारों के सदस्य अपने ही अपनों को इस तरह बेसहारा छोड़ सकते हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन महिलाओं के लिए आगे क्या कदम उठाता है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अभिषेक सेठ, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।मूल रिपोर्ट देखें ↗