वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भारतीय इस्पात क्षेत्र में निरंतर विकास और नई सुरक्षा पहल
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भारत के इस्पात क्षेत्र ने उत्पादन और खपत में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है। इस्पात मंत्रालय ने सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए एक नई परिषद और निदेशालय के गठन का निर्णय लिया है। साथ ही, एनएमडीसी और एसएआईएल जैसी कंपनियों ने नई परियोजनाओं और हरित हाइड्रोजन अनुसंधान के माध्यम से उद्योग को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
VIMARSHNAARAD TVवित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भारतीय इस्पात उद्योग ने उत्पादन और मांग के मोर्चे पर निरंतर प्रगति की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच कच्चे इस्पात का उत्पादन पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 2.9 प्रतिशत बढ़कर 85.1 मिलियन टन तक पहुंच गया। इसी अवधि में तैयार इस्पात की खपत में भी 7.5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो 84.9 मिलियन टन रही।
बाजार में इस्पात की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है। सितंबर 2026 तक टीएमटी बार, हॉट रोल्ड कॉइल और कोल्ड रोल्ड कॉइल जैसी सामग्रियों की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में 21 से 28 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। व्यापारिक गतिविधियों में, भारत मात्रा के आधार पर तैयार इस्पात का शुद्ध आयातक बना रहा, जबकि निर्यात में भी पिछले वर्ष की तुलना में सुधार देखा गया।
इस्पात मंत्रालय ने उद्योग में सुरक्षा संस्कृति को प्राथमिकता देते हुए 'इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद' (SISC) की स्थापना का निर्णय लिया है। यह सर्वोच्च निकाय सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने का कार्य करेगा। इसके साथ ही, 'इस्पात उद्योग सुरक्षा निदेशालय' (SISD) का गठन किया गया है, जो सुरक्षा ऑडिट और गंभीर घटनाओं की जांच के माध्यम से परिषद को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
एनएमडीसी ने छत्तीसगढ़ के नागरनार में अपना 2 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाला पेलेट संयंत्र चालू कर दिया है। यह 5,427 करोड़ रुपये की एकीकृत परियोजना का हिस्सा है, जिसमें लौह अयस्क प्रसंस्करण और स्लरी पाइपलाइन शामिल हैं। कंपनी का लौह अयस्क उत्पादन भी चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 23 प्रतिशत अधिक रहा है।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के बीच सहयोग भी बढ़ा है। एसएआईएल और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड ने पश्चिम बंगाल में कोयला ब्लॉकों के संयुक्त विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा, एसएआईएल के राउरकेला संयंत्र में एआई-आधारित सुरक्षा निगरानी प्रणाली लागू की गई है, जो कंप्यूटर विज़न के जरिए कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पहचान करती है।
हरित इस्पात की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। सितंबर 2026 तक 101 इस्पात उत्पादकों को हरित इस्पात प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। साथ ही, जादवपुर विश्वविद्यालय में हरित हाइड्रोजन अनुसंधान के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जिसमें एसएआईएल और अन्य संस्थानों का सहयोग शामिल है। यह पहल राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक होगी।