ताज़ा अपडेटवोट का अधिकार संवैधानिक है, इसे कोई छीन नहीं सकता: जस्टिस उज्जल भुइयां
Vimarsh Naarad TV logoस्वतंत्र डिजिटल न्यूज़Vimarsh–Naarad TVखबर • विमर्श • जनता की आवाज़
डिजिटल संस्करणYouTube
समाचार श्रेणियां

वोट का अधिकार संवैधानिक है, इसे कोई छीन नहीं सकता: जस्टिस उज्जल भुइयां

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि संविधान द्वारा प्रदत्त मतदान के अधिकार के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए नागरिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। जस्टिस भुइयां इससे पहले भी विभिन्न मंचों पर नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के महत्व पर अपनी बात रख चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने हाल ही में मतदान के अधिकार को लेकर एक अहम बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भारत के संविधान के तहत नागरिकों को जो वोट देने का अधिकार मिला है, वह अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार्य नहीं है।

बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस भुइयां ने एसआईआर प्रक्रिया की ओर इशारा करते हुए यह बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदान का अधिकार सबसे बुनियादी अधिकारों में से एक है, जिसे सुरक्षित रखना अनिवार्य है।

न्यायमूर्ति भुइयां ने अपने संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला कि किसी भी नागरिक को उसके इस संवैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कानून और संविधान के दायरे में रहकर ही शासन व्यवस्था चलनी चाहिए, जहाँ नागरिकों के अधिकारों का सम्मान सर्वोपरि हो।

यह पहली बार नहीं है जब जस्टिस भुइयां ने नागरिक अधिकारों के मुद्दे पर अपनी राय रखी है। इससे पहले भी वे विभिन्न अवसरों पर संवैधानिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के महत्व पर चर्चा कर चुके हैं।

उनके इस बयान को कानूनी और राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका की ओर से इस तरह की टिप्पणियां लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक हैं।

जस्टिस भुइयां ने यह भी संकेत दिया कि किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया को नागरिकों के मौलिक अधिकारों के आड़े नहीं आना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वोट का अधिकार एक ऐसा स्तंभ है जिस पर लोकतंत्र टिका हुआ है।

बीबीसी हिंदी के अनुसार, जस्टिस भुइयां की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब नागरिक अधिकारों और सरकारी प्रक्रियाओं के बीच संतुलन को लेकर बहस चल रही है। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों को सर्वोपरि रखने की वकालत की है।

अंत में, जस्टिस भुइयां का यह रुख स्पष्ट करता है कि न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनके विचार संवैधानिक सुरक्षा के प्रति न्यायपालिका के दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।

स्रोत

मूल संदर्भ

01BBC News हिंदीमूल रिपोर्ट देखें ↗