शामली धर्मांतरण मामला: हाईकोर्ट के फैसले पर पिता देवराज मलिक ने दी अपनी प्रतिक्रिया, कही ये बात
शामली के चर्चित धर्मांतरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष को अपनी पसंद से विवाह करने और धर्म चुनने की पूरी आजादी दी है। इस फैसले के बाद आयुष के पिता देवराज मलिक ने अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि आयुष उनका बेटा है और वे उसके बिना नहीं रह सकते। उन्होंने अदालत के निर्णय को स्वीकार करने की बात कही है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश के शामली जिले से जुड़े धर्मांतरण के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आयुष अपनी इच्छा के अनुसार जीवनसाथी चुनने और किसी भी धर्म का पालन करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। इस कानूनी निर्णय के बाद मामले से जुड़े पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
आयुष के पिता देवराज मलिक ने इस मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आयुष उनका बेटा है और वे उसके बिना रहने की कल्पना भी नहीं कर सकते। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि एक पिता के लिए अपने संतान से दूर होना बेहद कठिन होता है।
देवराज मलिक ने यह भी स्पष्ट किया कि वे हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं और उन्हें यह निर्णय मंजूर है। उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के प्रति अपनी सहमति जताते हुए कहा कि वे अदालत के आदेश का पालन करेंगे।
यह मामला काफी समय से चर्चा का विषय बना हुआ था। स्थानीय स्तर पर इस प्रकरण को लेकर विभिन्न तरह की बातें की जा रही थीं, लेकिन अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है।
अदालत ने अपने आदेश में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों को प्राथमिकता दी है। आयुष को अपनी मर्जी से जीवन जीने का अधिकार मिलने के बाद अब इस विवाद पर विराम लगने की उम्मीद है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, देवराज मलिक ने अपने बेटे के प्रति अपना प्रेम और लगाव व्यक्त करते हुए परिवार की स्थिति को भी बयां किया है। उन्होंने कहा कि वे अपने बेटे के साथ फिर से जुड़ने की कामना करते हैं।
फिलहाल, इस मामले में कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि आगे की परिस्थितियां किस तरह करवट लेती हैं।