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शामली धर्मांतरण मामले में सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने के आरोप में छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

उत्तर प्रदेश के शामली में आयुष मलिक धर्मांतरण विवाद से जुड़ी गलत जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करने के मामले में पुलिस ने छह लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा शामली पुलिस को फटकार लगाए जाने का दावा पूरी तरह से भ्रामक और निराधार है। अधिकारियों ने लोगों से सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के सूचनाएं प्रसारित न करने की अपील की है।

शामली में आयुष मलिक से जुड़े धर्मांतरण के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं के चलते स्थानीय पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस ने इस मामले में छह व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई उन लोगों के विरुद्ध की गई है जिन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गलत तथ्य साझा किए थे।

विवाद का मुख्य बिंदु इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़ी एक कथित खबर थी। सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि हाईकोर्ट ने इस मामले में शामली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। पुलिस प्रशासन ने इन दावों का खंडन करते हुए इन्हें पूरी तरह से असत्य और भ्रामक बताया है। पुलिस के अनुसार, इस तरह की खबरें समाज में गलत संदेश फैला रही थीं।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई नियमों के दायरे में रही है। हाईकोर्ट की ओर से किसी भी प्रकार की फटकार की बात निराधार है। पुलिस ने जनता से आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली किसी भी खबर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और न ही उसे आगे बढ़ाएं।

पुलिस ने चेतावनी दी है कि भ्रामक जानकारी फैलाकर शांति व्यवस्था को प्रभावित करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पुलिस इस मामले में दर्ज मुकदमे के आधार पर आगे की जांच कर रही है। सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए पुलिस की साइबर सेल भी सक्रिय है।

यह घटना सोशल मीडिया के दौर में सूचनाओं की सत्यता की जांच करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही विश्वास करें। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और पुलिस ने सभी से सहयोग की अपेक्षा की है।

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