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शिक्षक एमएलसी चुनाव: आवेदन निरस्त होने के बावजूद मतदाता सूची में नाम शामिल होने से उठे सवाल

शिक्षक एमएलसी चुनाव के लिए तैयार की गई मतदाता सूची पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। डीआईओएस द्वारा जिन आवेदनों को निरस्त कर दिया गया था, वे नाम भी अंतिम सूची में शामिल पाए गए हैं। कराहरा और डौकी जैसे क्षेत्रों के आंकड़ों से पता चला है कि खारिज किए गए आवेदनों के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों को मतदाता बना दिया गया है।

उत्तर प्रदेश में शिक्षक एमएलसी चुनाव की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी सामने आई है। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय द्वारा जिन आवेदनों को जांच के बाद निरस्त कर दिया गया था, वे नाम भी अंतिम मतदाता सूची में शामिल कर लिए गए हैं। इस विसंगति ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

संवाद न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पांच स्कूलों के आंकड़ों ने इस पूरी पोल को खोलकर रख दिया है। कराहरा क्षेत्र के एक उदाहरण में, 42 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमें से 41 को खारिज कर दिया गया था। इसके बावजूद, अंतिम सूची में 38 लोगों को मतदाता के रूप में दर्ज कर लिया गया।

इसी तरह की स्थिति डौकी क्षेत्र में भी देखने को मिली है। वहां 29 नाम मतदाता सूची से हटाए जाने थे, लेकिन इसके विपरीत 44 नए नाम मतदाता के रूप में जोड़ दिए गए। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक या लापरवाही के कारण अयोग्य आवेदकों को भी सूची में जगह मिल गई है।

शिक्षक एमएलसी चुनाव में मतदाता सूची की शुद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। जब डीआईओएस द्वारा आवेदनों को निरस्त किया जाता है, तो उनका नाम सूची में नहीं होना चाहिए। लेकिन इन आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि जमीनी स्तर पर सत्यापन और सूची तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर खामियां मौजूद हैं।

इस मामले के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिक्षक संगठनों ने भी इस पर नाराजगी जताई है और सूची की दोबारा जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अयोग्य लोग मतदाता बनेंगे, तो चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होगी।

प्रशासनिक अधिकारियों को अब इस मामले में स्पष्टीकरण देना होगा कि निरस्त किए गए आवेदन अंतिम सूची में कैसे शामिल हो गए। क्या यह तकनीकी त्रुटि है या इसके पीछे कोई और कारण है, इसकी जांच आवश्यक है। मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ी चुनाव की विश्वसनीयता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।

आगामी चुनाव को देखते हुए यह मुद्दा और भी गंभीर हो जाता है। यदि समय रहते इन त्रुटियों को ठीक नहीं किया गया, तो चुनाव प्रक्रिया पर विवाद बढ़ सकता है। फिलहाल, संबंधित स्कूलों और क्षेत्रों के आंकड़ों के आधार पर प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है कि वे सूची को दुरुस्त करें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें।

स्रोत

मूल संदर्भ

01सलोनी पांडे, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरामूल रिपोर्ट देखें ↗